
गोपालधारा मार्ग पर लगा गेट बना जनाक्रोश का कारण, स्थानीय लोगों ने पालिका और भाजपा नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप
अल्मोड़ा। गोपालधारा मार्ग में लगाए गए गेट को लेकर स्थानीय जनता में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह गेट न केवल आम लोगों की आवाजाही में बाधा बन रहा है, बल्कि वर्षों से मिल रही सार्वजनिक सुविधा को भी समाप्त करने का प्रयास है। लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए कुछ प्रभावशाली नेताओं को खुश करने में लगा हुआ है, जबकि आम जनता की परेशानियों से उसे कोई सरोकार नहीं रह गया है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार दिनांक 25 मार्च 2026 को बड़ी संख्या में लोगों ने नगर आयुक्त, नगर निगम अल्मोड़ा से मुलाकात कर इस गेट का विरोध दर्ज कराया था। लोगों ने स्पष्ट कहा था कि जिस मार्ग का उपयोग वर्षों से आम जनता कर रही है, उसे अचानक बंद करना या प्रतिबंधित करना पूरी तरह अनुचित है। इसके बावजूद आज तक प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिससे जनता में नाराजगी और अधिक बढ़ गई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि आज सरकार “हर घर सड़क” और “जन-जन तक सुविधा” पहुंचाने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जनता की सुविधाएं छीनी जा रही हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि जब शासन और प्रशासन का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं देना है, तो फिर सार्वजनिक मार्गों पर इस प्रकार के अवरोध खड़े करने का क्या औचित्य है।
स्थानीय लोगों ने यह भी माना कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा क्षेत्र में अनुचित गतिविधियां की गई होंगी, लेकिन उसकी सजा पूरे समाज को नहीं दी जा सकती। उनका कहना है कि यदि कुछ लोग गलत कार्य कर रहे हैं तो प्रशासन को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, न कि पूरे क्षेत्र की जनता को परेशान किया जाए। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन वास्तविक समस्या पर कार्रवाई करने के बजाय आसान रास्ता अपनाकर पूरे मार्ग को ही बाधित कर रहा है।
इस मामले में जनता ने नगर पालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि यह गेट कुछ भाजपा नेताओं के दबाव और उनकी नाराजगी से बचने के लिए लगाया गया है। क्षेत्रवासियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों के कहने पर पालिका ने जनता की भावनाओं को दरकिनार कर यह निर्णय लिया। लोगों ने कहा कि विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासन का रवैया पूरी तरह उदासीन बना हुआ है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि आम जनता की आवाज को महत्व नहीं दिया जा रहा।
जनता ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जनता के हितों और विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा अब केवल कुछ चहेते लोगों और चापलूसों तक सीमित होकर रह गई है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनसुविधाओं और विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब जनता वास्तविक समस्याओं को लेकर आवाज उठाती है तो उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता। क्षेत्रवासियों ने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि जनता की समस्याओं से अधिक महत्व राजनीतिक दबाव और निजी हितों को दिया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गोपालधारा मार्ग केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस मार्ग से बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और कामकाजी लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। गेट लगाए जाने से लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ गई हैं। कई लोगों ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में यह अवरोध गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन को जनता की सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की सुरक्षा या अनुशासन की समस्या है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, लेकिन सार्वजनिक मार्ग को बाधित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही गेट नहीं हटाया गया तो क्षेत्रवासी बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि जनता अब लगातार उपेक्षा सहने के मूड में नहीं है और यदि प्रशासन ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो इसका विरोध और तेज होगा।
फिलहाल गोपालधारा मार्ग का यह मुद्दा नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर जनता इसे अपनी सुविधा और अधिकारों से जुड़ा मामला मान रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की चुप्पी लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर प्रशासन जनता की मांगों को कब तक अनसुना करता रहेगा।



