
झूठी शिकायत व बदनाम करने के आरोपों पर संस्थान अध्यक्ष का स्पष्टीकरण, निष्पक्ष जांच की मांग
खबर सत्यवार्ता संवाददाता
अल्मोड़ा
अल्मोड़ा में एक विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच माँ अम्बे इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज के अध्यक्ष संदीप सिंह यदुवंशी ने अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए इसे झूठी शिकायत और संस्थान को बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने मीडिया से अपील की है कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाया जाए।
संदीप सिंह यदुवंशी के अनुसार, दिनांक 01 मई 2026 को दोपहर लगभग 3:15 बजे उन्हें अल्मोड़ा कोतवाली से फोन कर एक विवाद के संबंध में बातचीत के लिए बुलाया गया। शाम करीब 6 बजे वह कोतवाली पहुंचे, जहां पहले से ही संबंधित पक्ष, एक पत्रकार और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। उनके अनुसार, थानाध्यक्ष कार्यालय में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने और दूसरे पक्ष ने अपना-अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने और राजीनामा करने का निर्णय लिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और भ्रामक पोस्टों को रोकने के लिए दोनों पक्ष एक संयुक्त वीडियो बनाकर इसे सार्वजनिक करें, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। इस सुझाव को दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से स्वीकार किया।
यदुवंशी के अनुसार, इसके बाद दोनों पक्ष कोतवाली से बाहर निकलकर रघुनाथ मॉल स्थित एक रेस्टोरेंट में पहुंचे, जहां आपसी सहमति से संयुक्त वीडियो रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो बिना किसी दबाव के रिकॉर्ड किया गया था और इसे दोनों पक्षों ने अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा भी किया।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया कोतवाली से लेकर मॉल और रेस्टोरेंट तक विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है, जिससे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है। उनके अनुसार, वीडियो पोस्ट होने के बाद देर रात दूसरे पक्ष द्वारा फोन कर वीडियो हटाने का अनुरोध किया गया, जिसे उन्होंने मानते हुए वीडियो हटा भी दिया।
हालांकि, अगले दिन उन्हें जानकारी मिली कि उनके खिलाफ कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें उन पर धमकी देने और जबरन वीडियो बनवाने के आरोप लगाए गए हैं। यदुवंशी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और असत्य बताते हुए कहा कि पूरी बातचीत पुलिस की मौजूदगी में हुई थी और किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारिता के नाम पर कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है, जिससे उनके संस्थान और व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल उनके संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता उत्पन्न हो गई है।
यदुवंशी ने मीडिया से अपील की है कि इस मामले में तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को उजागर किया जाए और झूठी खबरों के प्रसार को रोका जाए। उन्होंने कहा कि वह पत्रकारिता की निष्पक्षता और नैतिकता पर पूर्ण विश्वास रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि सत्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई भी व्यक्ति झूठे आरोपों के माध्यम से किसी की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और अनावश्यक विवादों पर विराम लग सके।



