अल्मोड़ा। जनपद अल्मोड़ा को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से अल्मोड़ा पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा “नारकोटिक्स एनोनिमस तथा अल्कोहल एनोनिमस” सोसाइटी के सहयोग से चलाए जा रहे तीन दिवसीय जनजागरूकता एवं पुनर्वास अभियान का बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में सफल समापन हुआ। अभियान के दौरान नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ नशे से पीड़ित व्यक्तियों को पुनर्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चन्द्रशेखर घोडके के निर्देशन में “नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत अल्मोड़ा पुलिस लगातार जिले में जनजागरूकता कार्यक्रम चला रही है। पुलिस विभाग द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को अभियान से जोड़कर नशे के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में 14 मई को पुलिस लाइन सभागार में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जनपद पुलिस कर्मियों के अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुमाऊं रेंज के पुलिस जवान भी जुड़े।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और जवानों को पुनर्वास, नशामुक्ति जागरूकता और आमजन की सहभागिता से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नशे के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना और नशे से पीड़ित लोगों को पुनर्वास की मुख्यधारा से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
एसएसपी चन्द्रशेखर घोडके ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से व्यक्ति को कमजोर बना देती है। उन्होंने पुलिस कर्मियों से स्वयं और अपने परिवार से नशामुक्ति अभियान की शुरुआत करने का आह्वान किया, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सुधार और जनजागरूकता में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर नशे के खिलाफ आगे आएं तो इस सामाजिक बुराई को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में “नारकोटिक्स एनोनिमस एवं अल्कोहल एनोनिमस” सोसाइटी के सदस्यों ने अपने जीवन अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कभी नशे की गंभीर गिरफ्त में थे, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार के सहयोग और सही मार्गदर्शन के कारण उन्होंने नशे को छोड़कर नया जीवन शुरू किया। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति की सोच, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर देता है।
सोसाइटी के सदस्यों ने उपस्थित पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों को बताया कि पुनर्वास और सामाजिक सहयोग के माध्यम से नशे की लत से बाहर निकला जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे समाज के बीच जाकर लोगों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इस अवसर पर अल्मोड़ा पुलिस द्वारा “नशा मुक्त भारत अभियान” में सहयोग देने वाले सोसाइटी सदस्यों को सम्मान स्वरूप मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। पुलिस अधिकारियों ने समाजहित में उनके योगदान और नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला। एसएसपी की पहल से प्रेरित होकर जनपद अल्मोड़ा के पांच व्यक्तियों ने “नारकोटिक्स एनोनिमस एवं अल्कोहल एनोनिमस” सोसाइटी से संपर्क कर अपने पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने नशामुक्ति अभियान का हिस्सा बनकर समाज में जागरूकता फैलाने का भी संकल्प लिया।
इस दौरान रेड क्रॉस सोसाइटी अल्मोड़ा ने भी अल्मोड़ा पुलिस और सोसाइटी के साथ मिलकर जिले को नशामुक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में सीओ बलवन्त सिंह रावत, प्रतिसार निरीक्षक रमेश चन्द्र, प्रभारी एएनटीएफ एवं पीआरओ राहुल राठी, प्रभारी एसओजी सुनील धानिक, सहायक समाज कल्याण अधिकारी चन्द्र सहित पुलिस विभाग एवं सोसाइटी के सदस्य उपस्थित रहे।



