
देहरादून। नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन अवसर पर एक बार फिर उत्तराखंड से अपने गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित किया। सिर पर ब्रह्मकमल टोपी, भाषण में गढ़वाली-कुमाऊंनी के शब्द और प्रदेश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत स्थानीय बोली के शब्दों—भुला-भुली, सयाणा, आमा, बाबा—से करते हुए जनता से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने एक्सप्रेस-वे के निर्माण में मां डाटकाली के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए कहा कि देहरादून पर सदैव उनकी कृपा बनी रहती है। साथ ही संतला माता मंदिर का स्मरण करते हुए हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात, पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग का भी उल्लेख कर स्थानीय संस्कृति और आस्था से गहरा जुड़ाव दर्शाया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री और पुष्कर सिंह धामी के बीच मजबूत समन्वय भी देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री को लोकप्रिय, कर्मठ और युवा नेता बताते हुए उनकी सराहना की। वहीं कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं के बीच संवाद भी होता नजर आया।
इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तराखंड में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश के विकास को नई गति देगा। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है।
गडकरी ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर छह लेन मार्ग का उद्घाटन जून में प्रस्तावित है। वहीं 1650 करोड़ रुपये की लागत से पांवटा साहिब से देहरादून फोर लेन मार्ग जल्द शुरू होगा। हरिद्वार ग्रीनफील्ड बाईपास, ऋषिकेश बाईपास, रुद्रपुर और काशीपुर बाईपास जैसी परियोजनाएं भी निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि चारधाम सड़क परियोजना, टनकपुर-पिथौरागढ़-लिपुलेख मार्ग और विभिन्न रोपवे परियोजनाएं उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन महत्व को और मजबूत करेंगी। साथ ही सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे पर भी कार्य जारी है।
कार्यक्रम में राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, तीरथ सिंह रावत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वहीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा अन्य गणमान्य लोग वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि उनका हर दौरा उत्तराखंड के लिए नई ऊर्जा और विकास की सौगात लेकर आता है। उन्होंने बताया कि लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सौगात राज्य को मिली है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर को विशेष बताते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का भी स्मरण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक समरसता और समानता के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने बैसाखी और सिख नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये पर्व भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और कृषि परंपराओं के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद देश ने बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखंड को 21वीं सदी का दशक घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन कविता के माध्यम से करते हुए कहा, “अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारत।”
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को नंदा राजजात यात्रा पर आधारित स्मृति चिन्ह भेंट किया, जिसमें उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और आस्था की झलक दिखाई गई।



