
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता
संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन को लेकर जारी बहस के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। एक ओर जहां सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर समर्थन और विरोध को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष का रवैया विरोधाभासी रहा है और यह देश की महिलाओं के साथ न्याय नहीं करता।
“समर्थन देने वाले ही विरोध में”
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार स्थिति कुछ अलग है। उनके अनुसार, “पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया, बल्कि सरकार को समर्थन देने वाली कुछ पार्टियों ने ही आपत्ति जताई। इसका अर्थ साफ है कि राजनीतिक कारणों से इस विषय को उलझाया जा रहा है।”
उन्होंने संकेत दिया कि संसद में विधेयक को लेकर जो गतिरोध बना, उसमें राजनीतिक रणनीति की भूमिका अधिक रही है, न कि वास्तविक मुद्दों की।
2023 में पारित, अब संशोधन पर बहस
गृह मंत्री ने याद दिलाया कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह विधेयक नए संसद भवन में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय सभी दलों ने इसका समर्थन किया और इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
“जब यह नया संसद भवन बना, तब सबसे पहले इसी अधिनियम को पारित किया गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इसे व्यापक समर्थन मिला,” उन्होंने कहा।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब इसे लागू करने और संशोधन की बात आई है, तो वही विपक्ष विभिन्न शर्तों और आपत्तियों के साथ सामने आ रहा है।
महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े
अपने भाषण में गृह मंत्री ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया:
पहली लोकसभा में 22 महिला सदस्य
छठी लोकसभा में 19
आठवीं लोकसभा में 44
14वीं लोकसभा में 51
17वीं लोकसभा में रिकॉर्ड 78
18वीं लोकसभा में 75 महिला सदस्य चुनी गईं
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश की महिलाएं राजनीति में भागीदारी के लिए उत्सुक हैं और उन्हें अधिक अवसर देने की आवश्यकता है।
‘Women Led Development’ पर जोर
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने “women led development” के सिद्धांत पर काम किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के पहले मंत्रिमंडल में 10 महिलाओं को शामिल किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासन में कई राज्यों को पहली महिला मुख्यमंत्री मिलीं, जिनमें सुषमा स्वराज, उमा भारती, वसुंधरा राजे और आनंदीबेन पटेल जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा द्रौपदी मुर्मू को देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनाए जाने को भी उन्होंने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
विपक्ष पर तीखा हमला
गृह मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह हर बड़े निर्णय का विरोध करता आया है। उन्होंने कहा कि:
धारा 370 हटाने का विरोध हुआ
राम मंदिर निर्माण का विरोध हुआ
सीएए, जीएसटी, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का विरोध किया गया
ट्रिपल तलाक समाप्त करने का भी विरोध हुआ
उन्होंने कहा, “मोदी जी जो भी निर्णय लेते हैं, विपक्ष उसका विरोध करता है। अब जब महिलाओं के लिए आरक्षण लाया जा रहा है, तो उसका भी विरोध किया जा रहा है।”
राजनीतिक लाभ का आरोप
अमित शाह ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि इससे प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लगता है कि महिलाएं बड़ी संख्या में सरकार के पक्ष में मतदान करती हैं, इसलिए वह इस पहल से असहज है।
उन्होंने कहा, “अगर महिला आरक्षण लागू होता है, तो देश की माताओं-बहनों में प्रधानमंत्री का यश बढ़ेगा। विपक्ष इसी डर से इसका विरोध कर रहा है।”
ऐतिहासिक अवसर को न गंवाने की अपील
गृह मंत्री ने सभी सांसदों से अपील करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लें। उन्होंने इसे देश की महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय बताया।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर पहले ही 14 लाख से अधिक महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि महिलाएं नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
विपक्ष को चेतावनी
अपने भाषण के अंत में गृह मंत्री ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर पीछे हटता है, तो उसे चुनावों में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष पीछे हट रहा है। शाहबानो से लेकर ट्रिपल तलाक तक, हर बार महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष का रुख बदलता रहा है।”
संसद में जारी बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में लोकसभा में संभावित मतदान इस बात का निर्णय करेगा कि यह संशोधन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
देशभर की महिलाओं की निगाहें अब संसद पर टिकी हैं, जहां लिया गया निर्णय न केवल उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की दिशा भी तय करेगा।



