स्वच्छता और सामाजिक अनुशासन को लेकर समिति का कड़ा अभियान, पालतू कुत्तों को सार्वजनिक रास्तों पर शौच कराने और खुले में कूड़ा फेंकने वालों को चेतावनी
अल्मोड़ा। नगर निगम अल्मोड़ा की स्वच्छता व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों की निगरानी को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच झिंझाड़ क्षेत्र से एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय लोग ठान लें तो अपने मोहल्ले की तस्वीर बदलना मुश्किल नहीं है। नगर निगम की व्यवस्थाओं का इंतजार करने के बजाय मां राज राजेश्वरी मोहल्ला समिति ने स्वयं मैदान में उतरकर स्वच्छता, सामाजिक अनुशासन और सार्वजनिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया।
समिति के सदस्यों ने खम्मा मार्केट से लेकर तल्ला कसून, बख्शी खोला और झिंझाड़ तक पूरे क्षेत्र में भ्रमण कर स्थानीय लोगों से संवाद किया। अभियान के दौरान लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, सार्वजनिक रास्तों को गंदा न करने और सामाजिक अनुशासन का पालन करने के लिए जागरूक किया गया। समिति का यह अभियान केवल औपचारिक जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सार्वजनिक स्थानों पर फैल रही गंदगी और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार गतिविधियों पर सीधे तौर पर सवाल उठाए गए।
पालतू कुत्तों को रास्ते में शौच कराने पर समिति सख्त
अभियान के दौरान वार्ड के विभिन्न स्थानों पर ऐसे फ्लेक्स लगाए गए, जिनमें लोगों से अपने पालतू कुत्तों को सार्वजनिक रास्तों और आवाजाही वाले स्थानों पर शौच न कराने की अपील की गई। समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पालतू पशु रखना व्यक्तिगत अधिकार हो सकता है, लेकिन उसके कारण सार्वजनिक रास्तों, गलियों और अन्य स्थानों को गंदा करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
समिति के सदस्यों ने कहा कि रास्तों पर पालतू कुत्तों का मल छोड़ने से न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और दुकानदारों को भी परेशानी होती है। कई बार लोग अनजाने में इस गंदगी पर पैर रख देते हैं, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ संक्रमण और दुर्गंध जैसी समस्याएं भी पैदा होती हैं।
समिति ने चेतावनी दी कि जागरूकता के बावजूद यदि कोई व्यक्ति अपने पालतू कुत्ते को सार्वजनिक रास्ते में शौच कराता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए संबंधित स्तर पर शिकायत की जाएगी। समिति ने साफ कर दिया कि स्वच्छता के नाम पर केवल दूसरों को उपदेश देने का दौर अब खत्म होना चाहिए। जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को स्वयं निभानी होगी।
खुले में कूड़ा फेंकने वालों को भी चेतावनी
अभियान के दौरान लोगों से खुले में कूड़ा न फेंकने की अपील की गई। समिति ने कहा कि शहर को गंदा करने के लिए केवल नगर निगम को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। यदि नागरिक स्वयं घर का कूड़ा सार्वजनिक स्थानों, नालियों, रास्तों या खाली जगहों पर फेंकेंगे तो किसी भी सफाई व्यवस्था का असर लंबे समय तक नहीं रह सकता।
समिति ने लोगों से आग्रह किया कि घर से निकलने वाले कूड़े को निर्धारित व्यवस्था के तहत ही निस्तारित किया जाए और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।
समिति का कहना है कि स्वच्छ वार्ड केवल सफाई कर्मचारी या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की भी बराबर की जिम्मेदारी है। जब तक लोग अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद स्वच्छता अभियान अधूरे ही रहेंगे।
नशेड़ियों के जमावड़े पर भी समिति का कड़ा रुख
मोहल्ला समिति ने वार्ड में नशेड़ियों के बैठने और सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। समिति ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान को नशे और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों से आह्वान किया गया कि यदि किसी स्थान पर नशेड़ियों का जमावड़ा दिखाई देता है या सार्वजनिक स्थल पर संदिग्ध गतिविधियां होती हैं तो इसकी जानकारी समिति को दी जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों और पुलिस प्रशासन को सूचना दी जा सके।
समिति का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी भी मोहल्ले की सुरक्षा केवल पुलिस व्यवस्था से सुनिश्चित नहीं हो सकती। स्थानीय नागरिकों की सतर्कता और सामूहिक भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
नगर निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल
झिंझाड़ क्षेत्र की इस पहल ने अप्रत्यक्ष रूप से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिन कार्यों के लिए नगर निगम से नियमित निगरानी और जागरूकता की अपेक्षा की जाती है, उनके लिए स्थानीय नागरिकों को स्वयं आगे क्यों आना पड़ रहा है?
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की निगरानी और नागरिकों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। केवल सफाई वाहन भेज देना या समय-समय पर अभियान की तस्वीरें खिंचवा लेना पर्याप्त नहीं है। स्वच्छता व्यवस्था तभी सफल मानी जाएगी, जब वार्ड की गलियों, रास्तों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर उसका असर जमीन पर दिखाई दे।
झिंझाड़ की मोहल्ला समिति ने जिस तरह अपने स्तर से पहल शुरू की है, वह नगर निगम के लिए भी एक संदेश है कि नागरिक अब केवल शिकायत करने के बजाय व्यवस्था में भागीदारी निभाने के लिए तैयार हैं। जरूरत इस बात की है कि नगर निगम ऐसी नागरिक समितियों के साथ समन्वय स्थापित करे और उनके प्रयासों को संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराए।
सामाजिक अनुशासन के बिना स्वच्छता अधूरी
मोहल्ला समिति के सदस्यों ने कहा कि स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने तक सीमित विषय नहीं है। स्वच्छता का संबंध नागरिक व्यवहार, सामाजिक अनुशासन और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी से भी है।
यदि कोई व्यक्ति अपने घर को साफ रखता है लेकिन उसी घर का कूड़ा सड़क किनारे डाल देता है, पालतू कुत्ते को सार्वजनिक रास्ते में शौच कराता है या सार्वजनिक स्थान पर गंदगी करता है तो उसे स्वच्छता के प्रति जागरूक नागरिक नहीं कहा जा सकता।
समिति ने इसी सोच के साथ अभियान के दौरान लोगों से अपील की कि वे अपने घर के साथ-साथ मोहल्ले को भी अपना घर समझें। सार्वजनिक रास्ता किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। इसलिए उसकी स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील
समिति ने स्थानीय लोगों से कहा कि केवल शिकायत करने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि कोई व्यक्ति गंदगी फैलाता है तो उसका विरोध किया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए।
समिति ने कहा कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वच्छता और सामाजिक अनुशासन की मजबूत व्यवस्था स्थापित करना है। पहले चरण में लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर सार्वजनिक स्थानों को गंदा करता है या क्षेत्र का माहौल खराब करने वाली गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो समिति संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग करेगी।
समिति की पहल बनी चर्चा का विषय
झिंझाड़ क्षेत्र में मां राज राजेश्वरी मोहल्ला समिति की यह पहल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि शहर के अन्य वार्डों में भी इसी तरह स्थानीय समितियां जिम्मेदारी उठाएं और नगर निगम के साथ मिलकर काम करें तो स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
यह अभियान एक स्पष्ट संदेश देता है कि व्यवस्था को कोसते रहने के बजाय नागरिक यदि अपने हिस्से की जिम्मेदारी उठाएं तो बदलाव की शुरुआत अपने मोहल्ले से की जा सकती है। हालांकि नगर निगम की जिम्मेदारी इससे समाप्त नहीं होती। नगर निगम को भी ऐसे प्रयासों को केवल नागरिकों के भरोसे छोड़ने के बजाय नियमित सफाई, कूड़ा उठान, निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
समिति के सदस्यों ने कहा कि उनका लक्ष्य झिंझाड़ को केवल साफ नहीं, बल्कि सुरक्षित, अनुशासित और व्यवस्थित क्षेत्र बनाना है। इसके लिए आगे भी जागरूकता अभियान जारी रखा जाएगा।
ये लोग रहे मौजूद
अभियान में पार्षद अमित साह मोनू, खजान कांडपाल, राजेंद्र प्रसाद गुरुरानी, विवेक कनवाल, विवेक लोहनी, केतन पांडे, जगदीश वर्मा, शक्ति सिंह, शरद गुरुरानी, रजनी पंत, लोकेश तिवारी, संजय चौहान, पीयूष गुरुरानी, जहांगीर आलम, भावेश पांडे, आशीष गुरुरानी, अंकुर वोहरा, सागर गुरुरानी, भारत भट्ट, निखिल शाही, सुनील जोशी सहित अनेक स्थानीय लोग मौजूद रहे।
समिति का संदेश साफ है—सड़क आपकी है, मोहल्ला आपका है और स्वच्छता की जिम्मेदारी भी आपकी है। अब गंदगी फैलाकर दूसरों को दोष देने की मानसिकता बदलनी होगी।



