बालेश्वर वार्ड के ढुंगाधारा क्षेत्र में लगातार दिखाई दे रहा तेंदुआ, मवेशियों पर हमले के बाद बढ़ी थी दहशत; पार्षद बोले—क्या वन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
अल्मोड़ा। नगर निगम अल्मोड़ा के बालेश्वर वार्ड अंतर्गत ढुंगाधारा क्षेत्र में तेंदुए की लगातार मौजूदगी से स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से तेंदुए के दिखाई देने की घटनाओं के बीच एक महिला के तेंदुए का शिकार बनने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल हो जाती है और अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से भी डरने लगे हैं।
मामले को लेकर बालेश्वर वार्ड के पार्षद इन्द्र मोहन सिंह भण्डारी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्षद का कहना है कि उन्होंने वन विभाग को क्षेत्र में तेंदुए के आतंक की जानकारी देते हुए पत्र सौंपकर तत्काल पिंजरे लगाने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
पार्षद द्वारा वन प्रभाग अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी को दिए गए पत्र में ढंगाधारा क्षेत्र में तेंदुए के लगातार दिखाई देने की बात कही गई है। पत्र के अनुसार, 3 अगस्त की रात ढंगाधारा निवासी भावना आर्या पत्नी मुकेश कुमार की बकरियों को तेंदुए द्वारा अपना शिकार बनाए जाने की घटना का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि स्थिति गंभीर हो चुकी है और शाम होते ही लोग भय के कारण घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। बच्चों के स्कूल आने-जाने को भी असुरक्षित बताया गया है।
पत्र में पार्षद ने जनधन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग से तत्काल मौके पर टीम भेजने तथा तेंदुए को पकड़ने के लिए उपयुक्त स्थानों पर मजबूत पिंजरे लगाने का अनुरोध किया था।
‘जनप्रतिनिधि को भी नहीं किया गया संपर्क’
पार्षद इन्द्र मोहन सिंह भण्डारी का आरोप है कि वन विभाग को पत्र दिए जाने के बावजूद आज तक उनसे इस मामले में कोई संपर्क नहीं किया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर नगर निगम भेजा है, ऐसे में जनसुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में विभाग को कम से कम जनप्रतिनिधि से समन्वय करना चाहिए था।
पार्षद ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार तेंदुआ दिखाई दे रहा हो और उसके हमले की घटना भी सामने आ चुकी हो, तो विभाग की ओर से तत्काल निगरानी और आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और कोई बड़ा हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
उन्होंने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। हालांकि वन विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों में भी नाराजगी
ढुंगाधारा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी के कारण शाम के समय बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही को लेकर विशेष चिंता बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में तेंदुए के दिखाई देने की घटनाएं लगातार सामने आने के कारण लोग समूह में आवाजाही करने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जब कुछ प्रभावशाली लोगों की ओर से वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर विभाग को सूचना दी जाती है तो वन विभाग की गश्त तत्काल बढ़ जाती है, लेकिन आम जनता अथवा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर उतनी तत्परता नहीं दिखाई जाती। लोगों ने इस कथित भेदभावपूर्ण रवैये की जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को यह देखने के बजाय कि शिकायत किस व्यक्ति की ओर से आई है, मामले की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। तेंदुआ किसी व्यक्ति विशेष के क्षेत्र में नहीं, बल्कि आबादी वाले इलाके में घूम रहा है, इसलिए यह सीधे तौर पर जनसुरक्षा का मामला है।
पिंजरा लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग
क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से ढंगाधारा और बालेश्वर वार्ड के आसपास संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर नियमित गश्त बढ़ाने, तेंदुए की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा जरूरत के अनुसार पिंजरे लगाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि केवल कुछ समय के लिए गश्त करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। वन विभाग को क्षेत्र में तेंदुए की आवाजाही के संभावित रास्तों की पहचान कर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
पार्षद इन्द्र मोहन सिंह भण्डारी ने भी वन विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से ऐसी घटनाओं में समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाह वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि तेंदुए की मौजूदगी के बीच किसी व्यक्ति या बच्चे के साथ कोई गंभीर घटना न हो। वन विभाग की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
तेंदुए के आतंक पर पार्षद का सवाल—पत्र देने के बाद भी वन विभाग ने नहीं लिया संज्ञान
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