अल्मोड़ा न्यायालय का फैसला—व्यावसायिक लेनदेन, बैंक अभिलेख और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को मिला संदेह का लाभ
अल्मोड़ा।
अल्मोड़ा के न्यायिक मजिस्ट्रेट नवल सिंह बिष्ट की अदालत ने चार लाख रुपये के चेक अनादरण (चेक बाउंस) के चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि शिकायतकर्ता वैधानिक रूप से देय ऋण अथवा देनदारी को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहे, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।
परिवाद संख्या 604/2024 में शिकायतकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत परिवाद दायर करते हुए आरोप लगाया था कि आरोपी ने चार लाख रुपये के भुगतान के लिए चेक जारी किया था, जिसे बैंक ने धनराशि के अभाव में अनादृत कर दिया। इसके बाद विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता आजाद खान ने प्रभावी पैरवी की ।
सभी दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान एवं दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट नवल सिंह बिष्ट ने आरोपी को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
कानूनी जानकारों के अनुसार यह निर्णय चेक अनादरण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल चेक के अनादृत होने मात्र से दोषसिद्धि नहीं की जा सकती, बल्कि शिकायतकर्ता को यह भी प्रमाणित करना होता है कि चेक किसी वास्तविक एवं वैधानिक रूप से देय ऋण अथवा देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किया गया था।



