
अल्मोड़ा।
कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने सोमवार को अल्मोड़ा पहुंचकर जिलाधिकारी कार्यालय, जिलाधिकारी कोर्ट (कोड) तथा बंदोबस्त कार्यालय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न अनुभागों में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता से जुड़े मामलों का त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने विशेष रूप से जिलाधिकारी कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों पर गंभीरता दिखाई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राजस्व और प्रशासनिक मामलों में अनावश्यक विलंब जनता के लिए परेशानी का कारण बनता है। ऐसे में सभी लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और साप्ताहिक समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
लंबित मामलों पर जताई चिंता
कमिश्नर दीपक रावत ने कहा कि जिलाधिकारी कोर्ट में कई ऐसे मामले हैं जो लंबे समय से विचाराधीन हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने मामलों की अलग से सूची बनाकर विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक मामलों में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद आवश्यक है, जिससे आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाई जा सकती है।

रिकॉर्ड रूम का किया निरीक्षण, ब्रिटिशकालीन दस्तावेजों का अवलोकन
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने बंदोबस्त कार्यालय के रिकॉर्ड रूम का भी दौरा किया। यहां उन्होंने ब्रिटिश काल के पुराने अभिलेखों और दस्तावेजों का अवलोकन किया। सैकड़ों वर्ष पुराने इन दस्तावेजों को देखकर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन ऐतिहासिक अभिलेखों का विशेष संरक्षण किया जाए।
कमिश्नर ने कहा कि रिकॉर्ड रूम में कई ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज संरक्षित हैं, जो न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ऐतिहासिक और शोध कार्यों के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि नमी, दीमक और अन्य प्राकृतिक क्षति से बचाव के लिए रिकॉर्ड रूम में समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर उन्हें सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि कुमाऊं क्षेत्र का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है और ब्रिटिशकालीन दस्तावेज उस इतिहास के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। यदि इन अभिलेखों को सही तरीके से संरक्षित किया जाए तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर साबित होंगे।
शोधार्थियों को मिलेगा लाभ
कमिश्नर ने कहा कि कई शोधार्थी और इतिहासकार कुमाऊं के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक इतिहास पर अध्ययन करते हैं। ऐसे में यदि रिकॉर्ड सुव्यवस्थित और सुरक्षित रहेंगे तो उन्हें शोध कार्य में सुविधा होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रिकॉर्ड रूम की सूची व्यवस्थित की जाए और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की श्रेणीवार सूची तैयार कर सुरक्षित अलमारी या विशेष संरक्षित कक्ष में रखा जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में एक डिजिटल आर्काइव की स्थापना की जाए, जिससे अभिलेखों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और दस्तावेजों के क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी कम होगी।
हवाई सेवा पर जताया संतोष
निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत में कमिश्नर दीपक रावत ने राज्य सरकार द्वारा संचालित हवाई सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल से पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। अब दूरस्थ क्षेत्रों से लोग कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले पहाड़ी क्षेत्रों से मैदानी इलाकों तक पहुंचने में कई घंटे या पूरा दिन लग जाता था, लेकिन हवाई सेवा शुरू होने से समय की बचत हो रही है। इससे व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में हवाई सेवाओं का और विस्तार होगा, जिससे कुमाऊं मंडल के अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सकेगी।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश
कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा कि जनहित सर्वोपरि है और प्रत्येक अधिकारी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कार्यालयों में साफ-सफाई, फाइलों के सुव्यवस्थित रखरखाव और समय पर कार्य निष्पादन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए और शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न शाखाओं में जाकर कर्मचारियों से संवाद भी किया और कार्यप्रणाली की जानकारी ली।
समापन
कुल मिलाकर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण को लेकर गंभीरता दिखाई। उनके निर्देशों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अल्मोड़ा के प्रशासनिक तंत्र में इस निरीक्षण के बाद नई सक्रियता देखने को मिल सकती है। अब यह देखना होगा कि अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किस प्रकार और कितनी शीघ्रता से किया जाता है।





