
उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने पारदर्शी नीति लागू करने की मांग उठाई
अल्मोड़ा (संवाददाता):
उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन, उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार जोशी और सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने शिक्षा विभाग में लगातार दूसरे वर्ष भी स्थानांतरण न होने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। संगठन पदाधिकारियों ने प्रेस को जारी बयान में सरकार, शासन और विभागीय नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे शिक्षकों और कार्मिकों के हितों की अनदेखी बताया है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय, शासन और सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के कारण शिक्षा विभाग की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। एक ओर जहां शिक्षकों की पदोन्नतियां बाधित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से स्थानांतरण न होने के कारण कार्मिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस स्थिति को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा स्थानांतरण को लेकर दोहरी नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस सुगम-दुर्गम के आधार पर शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नहीं किए जा रहे हैं, उसी आधार पर अन्य विभागों को कोटिकरण चिन्हित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि राज्य में आखिर किस आधार पर नीतियां बनाई जा रही हैं और उनका क्रियान्वयन किस तरह हो रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से जवाब मांगते हुए कहा कि जब न्यायालय सुगम-दुर्गम के आधार पर स्थानांतरण करने से मना कर चुका है, तो फिर उसी आधार पर स्थानांतरण के लिए चिन्हीकरण करने की प्रक्रिया क्यों चलाई जा रही है। उन्होंने इसे नीतिगत विरोधाभास करार दिया।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के शीर्ष कर्मचारी संगठनों द्वारा जनपद स्तर की समस्याओं को गंभीरता से नहीं उठाया जा रहा है, जिससे हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाज दब रही है। उन्होंने कहा कि संगठनों का गठन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है, लेकिन वर्तमान में उनका यह दायित्व सही तरीके से निभाया नहीं जा रहा है।
डॉ. मनोज कुमार जोशी और धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि वर्ष 2017 से अब तक कई शिक्षकों, वरिष्ठ कर्मचारियों और गंभीर बीमार कार्मिकों के स्थानांतरण लंबित हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना चाहिए।
संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिगंबर फुलोरिया, उपाध्यक्ष महेश आर्य, कार्यालय सचिव गणेश भंडारी, दीपक तिवारी, संगठन मंत्री डी.के. जोशी, संयुक्त मंत्री राजेन्द्र लटवाल, तारा सिंह बिष्ट, भगवत सिंह सतवाल, ऑडिटर दीपशिखा मेल, कन्या कोषाध्यक्ष संजय जोशी, संरक्षक मंडल सदस्य पी.एस. बोरा, गोकुल मेहता, महेन्द्र गुसाईं, रमेश पांडेय और विकास भवन संगठन अध्यक्ष पी.सी. जोशी ने भी पारदर्शी और समान स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की।
संगठन ने सरकार से गोल्डन कार्ड की विसंगतियों को दूर करने, फारगो नियमावली में संशोधन करने और सभी विभागों में समय पर पदोन्नति सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए वर्ष 1994 में शिक्षकों और कर्मचारियों ने तीन महीने तक आंदोलन किया था, लेकिन आज उन्हीं की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।



