
भव्य सांस्कृतिक जुलूस से हुआ आगाज, ‘उत्तराखंड संवाद’ में उठे जमीनी मुद्दे
अल्मोड़ा (संवाददाता):
सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा एक बार फिर सामाजिक सरोकारों और जनपक्षीय पत्रकारिता के केंद्र में नजर आई, जब यहां दो दिवसीय 33वें उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन नगर में निकाले गए सांस्कृतिक जुलूस ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-दमाऊं की थाप के बीच निकले इस जुलूस ने अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया।
समारोह के अंतर्गत जिला पंचायत सभागार में ‘उत्तराखंड संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आए पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस संवाद कार्यक्रम में वर्तमान समय की पत्रकारिता, विशेषकर जनपक्षीय पत्रकारिता की चुनौतियों और उसके बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब मीडिया का बड़ा हिस्सा बाजारवाद और राजनीतिक प्रभावों के दबाव में काम कर रहा है, तब जनपक्षीय पत्रकारिता को बचाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जमीनी मुद्दे, ग्रामीण समस्याएं, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे विषय मीडिया के मुख्यधारा विमर्श से धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज बनना है, लेकिन वर्तमान समय में इस उद्देश्य को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह तेज हुआ है, लेकिन इसके साथ ही फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पत्रकारों को निष्पक्षता, सत्यता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को अपनाते हुए कार्य करना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
इस दौरान उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा की नवनियुक्त कार्यकारिणी को सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित गणमान्य लोगों ने नई कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे पत्रकारिता के मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए कार्य करेंगे और समाज के जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद पंत राजू ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां समाज और पत्रकारिता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि उमेश डोभाल ने अपने जीवन में जनपक्षीय पत्रकारिता को जो दिशा दी, वह आज भी प्रासंगिक है और उसी दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में उपपा केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि समाज में हो रहे अन्याय और असमानता के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची पत्रकारिता है। उन्होंने कहा कि जब तक पत्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को मंच नहीं देंगे, तब तक पत्रकारिता का उद्देश्य अधूरा रहेगा।
उत्तराखंड प्रेस क्लब के अध्यक्ष जगदीश चंद्र तिवारी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि पत्रकारों को अपने पेशे की गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्षता और ईमानदारी से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों के सामने कई प्रकार के दबाव होते हैं, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद सच्चाई को सामने लाना ही पत्रकार का धर्म है।
कार्यक्रम में चंद्रशेखर द्विवेदी, सचिव अशोक पांडे, उपसचिव कपिल मल्होत्रा, उपसचिव संस्था मोहित अधिकारी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारिता को जनहित के मुद्दों से जोड़े रखना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर रमेश जोशी, किशन जोशी, हिमांशु लटवाल, नसीम अहमद, अमित उप्रेती, प्रकाश पांडे, प्रकाश पंत, ईश्वरी दत्त जोशी, डॉ. निर्मल जोशी, नवीन बिष्ट, रोहित भट्ट, राजीव लोचन साह, जयमित्र सिंह बिष्ट, दयाकृष्ण कांडपाल, विभू कृष्णा, हरीश भंडारी, जगजीवन बिष्ट सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया और सभी सत्रों में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। संवाद कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने भी सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिससे चर्चा और भी सार्थक बन गई।
समारोह के पहले दिन का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम में एक अलग ही ऊर्जा भर दी।
आयोजकों के अनुसार समारोह के दूसरे दिन भी विभिन्न बौद्धिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सम्मान समारोह, विचार गोष्ठी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
कुल मिलाकर, 33वां उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा मिलता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें निभाएं।




