भोज बोले—सरकारी संपत्तियां जनता की अमानत, सरकार सार्वजनिक करे पूरी प्रक्रिया
अल्मोड़ा। उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी विभागों की बहुमूल्य भूमि एवं संपत्तियों को लीज पर देने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से प्रदेश की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियों के निजी इस्तेमाल का रास्ता तैयार हो रहा है।
भोज ने कहा कि उत्तराखंड की जमीन केवल सरकार की संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की अमानत है। ऐसे में सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीनों को लंबे समय के लिए लीज पर देने से पहले सरकार को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जनता को बताया जाए कि कौन-सी जमीन किस व्यक्ति या कंपनी को, कितनी अवधि के लिए और किन शर्तों पर दी जा रही है।
उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का उदाहरण देते हुए कहा कि लगभग 142 एकड़ भूमि और विकसित पर्यटन सुविधाओं को निजी ऑपरेटर को 15 वर्ष के लिए दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। जनवरी 2026 के एक उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में भी 142 एकड़ भूमि को वैध रूप से आमंत्रित बोली के बाद सफल बोलीदाता को दिए जाने का उल्लेख है।
भोज ने कहा कि यदि किसी सरकारी संपत्ति का बाजार मूल्य बहुत अधिक है और उसे अपेक्षाकृत कम लीज राशि पर लंबे समय के लिए दिया जाता है, तो सरकार को उसकी आर्थिक गणना, निविदा प्रक्रिया और वित्तीय औचित्य सार्वजनिक करना चाहिए। कांग्रेस की ओर से जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के संबंध में करीब एक करोड़ रुपये वार्षिक लाइसेंस फीस का दावा भी किया गया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने UIIDB को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित उत्तराखंड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड के माध्यम से सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। UIIDB की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बोर्ड का उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी सहित विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
भोज ने कहा कि एक ओर प्रदेश के युवाओं, किसानों और आम लोगों को जमीन तथा रोजगार के अवसरों की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी संपत्तियों को निजी परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी सभी संपत्तियों का बाजार मूल्य, लीज राशि, अवधि, निविदा प्रक्रिया, शर्तें और संबंधित कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों की सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े निर्णयों में दीर्घकालिक जनहित और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भोज ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकारी जमीनों को लीज पर देने और पीपीपी मोड में विकसित करने से संबंधित सभी प्रस्तावों एवं समझौतों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारी संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को जनता के बीच उठाया जाएगा।



