
रानीखेत।
सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से सांस्कृतिक समिति रानीखेत की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी महीनों में आयोजित किए जाने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने सर्वसम्मति से तय किया कि मई माह में महिलाओं की रामलीला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा अप्रैल माह में स्कूली बच्चों के लिए पारंपरिक छोलिया नृत्य कार्यशाला तथा महिलाओं व छात्राओं के लिए ऐपण और रंगवाली पिछोड़ी कार्यशाला का आयोजन भी किया जाएगा।
समिति अध्यक्ष विमल सती की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में क्षेत्र की सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की शुरुआत लोक संस्कृति और लोक संगीत के समर्पित साधक रहे स्वर्गीय लोक गायक व रंगकर्मी दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करके की गई। उपस्थित सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके सांस्कृतिक योगदान को याद किया। सदस्यों ने कहा कि स्व. दीवान कनवाल ने अपने गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से कुमाऊँनी लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने का कार्य किया था। उनके निधन से क्षेत्र की सांस्कृतिक दुनिया को बड़ी क्षति हुई है।
बैठक के दौरान हाल ही में आयोजित फागोत्सव कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। समिति के सदस्यों ने फागोत्सव के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया और इसके लिए सभी परिश्रमी सदस्यों तथा सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिन लोगों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया, उन्हें विशेष धन्यवाद दिया गया। समिति के कोषाध्यक्ष गौरव तिवारी ने इस अवसर पर फागोत्सव के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन में समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों का भरपूर सहयोग मिला, जिसके कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
बैठक में आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई। समिति ने निर्णय लिया कि अप्रैल माह में स्कूली बच्चों के लिए पारंपरिक छोलिया नृत्य कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना और उन्हें पारंपरिक नृत्य की जानकारी देना है। कार्यशाला में प्रशिक्षित कलाकारों द्वारा बच्चों को छोलिया नृत्य की बारीकियों, उसकी शैली और उसके सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसी प्रकार महिलाओं और छात्राओं के लिए भी अप्रैल माह में ऐपण और रंगवाली पिछोड़ी कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। ऐपण उत्तराखंड की एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोक कला है, जिसमें विशेष अवसरों पर घरों के आंगन और दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं। वहीं रंगवाली पिछोड़ी कुमाऊँ क्षेत्र की पारंपरिक वेशभूषा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे विशेष रूप से मांगलिक अवसरों पर पहना जाता है। समिति का मानना है कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं के बारे में जानकारी मिलेगी और लोक कला को संरक्षण मिलेगा।
पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त जारी होने पर वीपीकेएएस में भव्य कार्यक्रम, किसानों को दी आधुनिक कृषि की जानकारी https://khabarsatyvartaa.com/a-grand-program-was-organized-at-vpkas-to-mark-the-release-of-the-22nd-installment-of-the-pm-kisan-scheme-where-farmers-were-given-information-on-modern-agriculture/
इसके साथ ही बैठक में मई माह में महिलाओं की रामलीला प्रतियोगिता आयोजित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। समिति ने तय किया कि इस प्रतियोगिता में क्षेत्र की विभिन्न महिला टीमों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता में प्रतिभागी टीमें रामलीला के विभिन्न संवाद और प्रसंगों का मंचन प्रस्तुत करेंगी। समिति के अनुसार इस प्रतियोगिता का उद्देश्य महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करना और उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि प्रतियोगिता के विजेता दलों को आकर्षक प्राइज मनी और ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही सभी प्रतिभागी टीमों को भी सम्मानित किया जाएगा, ताकि उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन मिल सके। समिति का मानना है कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से महिलाओं के भीतर छिपी कला और अभिनय प्रतिभा को सामने आने का अवसर मिलेगा।
बैठक के दौरान कथक नृत्य की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अभ्यास कक्ष की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि विद्यार्थियों को बेहतर अभ्यास के लिए उचित स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे अपनी परीक्षाओं की तैयारी अच्छे तरीके से कर सकें।
बैठक में संगठन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से तीन नए सदस्यों को समिति की सदस्यता भी प्रदान की गई। नए सदस्यों का स्वागत करते हुए अध्यक्ष विमल सती ने उम्मीद जताई कि वे समिति की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन में अपना योगदान देंगे।
समिति के सदस्यों ने यह भी कहा कि रानीखेत और आसपास के क्षेत्रों में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के आयोजन लगातार किए जाते रहेंगे। उनका मानना है कि लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
बैठक में सांस्कृतिक समिति के कई सदस्य मौजूद रहे। इनमें राजेंद्र पंत, दीपक पंत, संजय पंत, गौरव तिवारी, ज्योति साह, गीता जोशी, विनिता खाती, रीना वर्मा, अभिषेक कांडपाल, सोनू सिद्दीकी, पंकज साह, सौरभ अग्रवाल और शुभम अग्रवाल सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
समिति ने अंत में यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर क्षेत्र की लोक संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक धरोहर को आगे बढ़ाने का कार्य किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने स्थानीय लोगों से भी इन कार्यक्रमों में सहयोग और सहभागिता की अपील की, ताकि रानीखेत की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।



