अभिभावकों और NIPTA ने सौंपे दस्तावेज; फीस वसूली, छात्रों के दस्तावेज रोकने, शिक्षकों के वेतन और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल
हल्द्वानी/नैनीताल। गौलापार स्थित वेंडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विद्यालय के खिलाफ गठित संयुक्त जांच एवं निरीक्षण समिति (Joint Inquiry & Inspection Committee) ने जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में नेशनल इंडिपेंडेंट प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन (NIPTA) और पीड़ित अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच समिति के समक्ष दस्तावेज और अभिलेख प्रस्तुत किए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामला महज फीस विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेज, शिक्षकों के वेतन, शुल्क वसूली और विद्यालय के वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई गंभीर सवाल जांच के दायरे में हैं।
फीस विवाद में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि फीस विवाद के चलते छात्र की 10वीं की मूल मार्कशीट रोकी गई। शिकायत के अनुसार दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण छात्र की आगे की पढ़ाई प्रभावित हुई और उसके दो शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि छात्र की टीसी पर बकाया राशि दर्ज की गई। इसी तरह 12वीं उत्तीर्ण छात्र तरुण शर्मा के दस्तावेज रोके जाने का मामला भी जांच समिति के सामने रखा गया है।
शिक्षकों के वेतन को लेकर भी घिरा प्रबंधन
NIPTA ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO), नैनीताल के आदेशों का हवाला देते हुए विद्यालय पर शिक्षकों के वेतन से संबंधित गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। संगठन के अनुसार, पूर्व शिक्षक अमित जोशी के वेतन का मामला भी सरकारी अभिलेखों में सामने आया है।
इसके अलावा शिक्षकों को निर्धारित वेतनमान नहीं दिए जाने और सेवा शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर भी शिकायतें जांच समिति के समक्ष रखी गई हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
निजी खातों और UPI से फीस वसूली के आरोप
मामले का सबसे गंभीर पहलू विद्यालय के कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है। NIPTA और अभिभावकों का दावा है कि RTI से प्राप्त सूचनाओं तथा ऑडिट रिपोर्टों में ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं जिनकी जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विद्यालय के गैर-लाभकारी स्वरूप के बावजूद भारी मुनाफे से संबंधित प्रविष्टियां सामने आईं। साथ ही प्रबंध समिति से जुड़े परिजनों को संस्था की राशि से कथित तौर पर अग्रिम या ऋण दिए जाने तथा समानांतर बैंक खातों एवं निजी UPI माध्यमों से फीस वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की वास्तविकता और वित्तीय नियमों के अनुपालन की स्थिति अब जांच समिति के अभिलेखीय परीक्षण का अहम हिस्सा है।
ट्यूशन फीस के अलावा कई मदों में कथित अतिरिक्त वसूली
अभिभावकों ने विद्यालय पर ट्यूशन फीस के अतिरिक्त बिजली, पानी, SMS और रसीद शुल्क जैसे मदों में भी रकम वसूलने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन शुल्कों की वैधता और विद्यालय द्वारा इनके लिए अपनाई गई प्रक्रिया की भी जांच की जानी चाहिए।
मूल दस्तावेज लौटाने और कार्रवाई की मांग
NIPTA और अभिभावकों ने जांच समिति से मांग की है कि छात्रों के रोके गए मूल शैक्षणिक दस्तावेज तत्काल जारी कराए जाएं, बकाया राशि का उल्लेख किए बिना नियमानुसार टीसी उपलब्ध कराई जाए और विद्यालय की राज्य सरकार के NOC तथा CBSE संबद्धता से जुड़े नियमों की भी जांच की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने कथित नियम उल्लंघन प्रमाणित होने की स्थिति में विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल संयुक्त जांच समिति विद्यालय से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच कर रही है। लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित सरकारी अभिलेखों के आधार पर ही होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में छात्रों के दस्तावेज रोकने, शुल्क वसूली, शिक्षकों के वेतन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विद्यालय प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों में कौन-कौन से आरोप अभिलेखीय जांच में सही पाए जाते हैं और किन मामलों में कार्रवाई की संस्तुति की जाती है।



