
अल्मोड़ा, संवाददाता:
विकासखंड भैंसियाछाना के अंतर्गत ग्राम पंचायत सुकना से ग्राम पंचायत पभ्या तक प्रस्तावित लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। इस लेटलतीफी के कारण क्षेत्रीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे ग्रामीणों ने अब प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज तेज कर दी है और जल्द समाधान की मांग की है।
इसी क्रम में, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रवि रौतेला के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सड़क निर्माण कार्य को अविलंब प्रारंभ कराने की मांग करते हुए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा।
शुरुआती प्रक्रिया पूरी, फिर भी काम ठप
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया that सड़क निर्माण के लिए आवश्यक प्रारंभिक औपचारिकताएं काफी पहले पूरी कर ली गई थीं। पिलर लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है और वन विभाग द्वारा पेड़ों की छपान (गणना) की प्रक्रिया भी संपन्न हो चुकी है। इसके बावजूद, लोक निर्माण विभाग (PWD) और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी और उदासीनता के चलते पिछले छह महीनों से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो फिर कार्य में इस प्रकार की देरी समझ से परे है। इस लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
दुर्गम क्षेत्र में जीवन कठिन, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
ग्राम पंचायत पभ्या मुख्य सड़क से लगभग 9 किलोमीटर की कठिन और सीधी चढ़ाई पर स्थित है। सड़क सुविधा के अभाव में यहां का जीवन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो गया है। विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। कई बार मरीजों को डोली के सहारे ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ग्रामीणों का दावा है कि कई मामलों में मरीजों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जो अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा,
“सड़क न होने के कारण हमारी जिंदगी आज भी दशकों पीछे है। इलाज, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हमें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”
पहले भी दिया गया था अल्टीमेटम
यह पहला अवसर नहीं है जब ग्रामीणों ने अपनी मांग उठाई हो। इससे पहले 10 मार्च 2026 को भी ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 15 दिनों की समयसीमा दी थी। उस समय प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था।
लेकिन तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने एक बार फिर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। इस बार ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सड़क निर्माण कार्य को जल्द से जल्द प्रारंभ कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा आवंटित सीए (Compensatory Afforestation) भूमि में से प्रस्तावित 2.88 हेक्टेयर भूमि को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि सभी बाधाओं को दूर करते हुए तत्काल निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
प्रशासन की इस त्वरित प्रतिक्रिया से ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है। लोगों का कहना है कि यदि इस बार भी कार्य में देरी हुई, तो उनका भरोसा प्रशासन से उठ जाएगा।
रवि रौतेला का बयान
इस अवसर पर भाजपा नेता एवं पूर्व जिला अध्यक्ष रवि रौतेला ने कहा,
“सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से आज भी क्षेत्र के लोग वंचित हैं, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने लगातार इस मुद्दे को शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया है और आगे भी मजबूती से उठाते रहेंगे। जब सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो कार्य में देरी किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो हम जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रीय विकास और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ग्रामीणों की उम्मीदें फिर जागीं
ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम प्रधान जानकी देवी सहित गिरीश जोशी, मोहन चंद्र जोशी, विशन जोशी, हरीश भट्ट, शेखर जोशी, हरीश आर्या समेत कई प्रबुद्ध ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि दशकों के लंबे इंतजार के बाद अब जाकर उनके गांव में विकास की किरण दिखाई दे रही है। यदि सड़क का निर्माण समय पर पूरा हो जाता है, तो इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सुकना से पभ्या तक प्रस्तावित सड़क केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की रीढ़ है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह अपने आश्वासन को कितनी जल्दी धरातल पर उतारता है और कब तक यह बहुप्रतीक्षित सड़क हकीकत का रूप लेती है।



