मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, मशीन संचालन और व्यवसायिक प्रस्ताव तैयार करने की दी जानकारी
अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादित हल्दी, अदरक एवं मंडुवा जैसी फसलों को बाजार से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 19 से 21 अगस्त 2026 तक चले प्रशिक्षण का उद्देश्य पर्वतीय कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर विकसित करना रहा।
निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के निर्देशन में आयोजित यह कार्यक्रम जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की एक परियोजना के तहत आयोजित किया गया। परियोजना में विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ लोकचेतना मंच, रानीखेत भी सहभागी है।
किसानों को उत्पाद तैयार करने की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मंडुवा से विभिन्न कन्फेक्शनरी एवं बेकरी उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वहीं हल्दी, अदरक और मंडुवा से तैयार उत्पादों की पैकेजिंग एवं लेबलिंग की बारीकियों से भी अवगत कराया गया।
प्रतिभागियों को प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण कराकर विभिन्न उत्पादों और आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर उन्हें बेहतर बाजार मूल्य दिलाया जा सकता है।
व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रस्ताव तैयार करना सिखाया
प्रशिक्षण के दौरान प्रसंस्करण आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए व्यावसायिक प्रस्ताव तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके अलावा हल्दी, अदरक एवं मंडुवा के प्रसंस्करण में उपयोग होने वाली विभिन्न मशीनों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर किसानों को उनकी उपयोगिता और कार्यप्रणाली समझाई गई।
आयोजकों ने कहा कि स्थानीय कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
महिला किसानों की भी रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया। इस दौरान प्रशिक्षण से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं और उनके संभावित समाधानों पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षण के सफल समापन पर कार्यवाहक निदेशक डॉ. निर्मल हेडाऊ ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
कार्यक्रम के समन्वयक जय प्रकाश आदित्य, डॉ. अनुराधा भारती एवं डॉ. रमेश सिंह पाल रहे। प्रशिक्षण में हवालबाग, द्वाराहाट और रामगढ़ के छह गांवों—ऐना, चितई, बग्वाली पोखर, मल्याल, गल्ली बस्युरा और सूपी—के 25 कृषकों ने भाग लिया। इनमें 12 पुरुष और 13 महिला किसान शामिल थीं।
हल्दी-अदरक और मंडुवा से उद्यमिता की राह, किसानों को दिया प्रशिक्षण
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