अल्मोड़ा। नगर निगम अल्मोड़ा के सेलाखोला वार्ड संख्या-02 की पार्षद वंदना वर्मा ने भारतीय जनता पार्टी के जिला निकाय प्रकोष्ठ की महा-संयोजिका के पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को दिए गए इस्तीफे के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। वंदना वर्मा ने अपना इस्तीफा भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल तथा दर्जा राज्य मंत्री गोविंद पिलखवाल को संबोधित करते हुए सौंपा है।
अपने इस्तीफा पत्र में वंदना वर्मा ने कहा है कि वह सेलाखोला वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपने वार्डवासियों के सहयोग से जनप्रतिनिधि निर्वाचित हुई हैं। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें जिला निकाय प्रकोष्ठ में महा-संयोजिका का दायित्व दिया गया, जिसका उन्होंने सम्मान करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया।
वंदना वर्मा का आरोप है कि पार्टी में शामिल कुछ लोगों द्वारा लगातार उनकी उपेक्षा की गई और उन्हें बार-बार अपमानित महसूस कराया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित लोगों को पहले भी अवगत कराया, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते उन्होंने अपने स्वाभिमान और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए निकाय प्रकोष्ठ के पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा जिला निकाय प्रकोष्ठ की महा-संयोजिका के पद से है। हालांकि, पत्र में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट है कि उन्होंने संगठन में दिए गए दायित्व से खुद को अलग किया है, न कि पार्टी की सदस्यता छोड़ने की घोषणा की है।
वंदना वर्मा के इस कदम के बाद अल्मोड़ा की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नगर निगम से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के बीच एक निर्वाचित पार्षद द्वारा पार्टी संगठन के पद से इस्तीफा देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर तब, जब नगर निगम स्तर पर विभिन्न मुद्दों को लेकर पार्षदों और संगठन के बीच समन्वय को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं।
वंदना वर्मा ने अपने पत्र के अंत में कहा कि उन्होंने अपने स्वाभिमान का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है। उनके इस्तीफे के बाद अब भाजपा संगठन की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर भी है कि क्या यह इस्तीफा केवल संगठनात्मक दायित्व तक सीमित रहता है या आने वाले समय में इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव देखने को मिलते हैं। फिलहाल वंदना वर्मा ने अपने इस्तीफे के माध्यम से पार्टी संगठन में अपनी उपेक्षा और असम्मान की भावना को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है।
भाजपा को झटका: पार्षद वंदना वर्मा ने निकाय प्रकोष्ठ के पद से दिया इस्तीफा
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