अल्मोड़ा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रस्तावित अल्मोड़ा रैली को लेकर जहां पार्टी कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं रैली से पहले शहर में एक नई राजनीतिक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। राहुल गांधी के स्वागत के लिए शहर में लगाए गए होर्डिंग्स और स्वागत द्वारों से स्थानीय विधायक मनोज तिवारी की तस्वीर और नाम गायब होने को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए स्वागत बैनरों और होर्डिंग्स में राहुल गांधी, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस नेताओं की तस्वीरें तो प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं, लेकिन अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज तिवारी का कहीं नामोनिशान नहीं दिख रहा। यही बात अब राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक की तस्वीर और नाम का प्रमुखता से शामिल होना सामान्य परंपरा मानी जाती है। ऐसे में विधायक की तस्वीर का पूरी तरह गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग इसे महज एक तकनीकी भूल मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
शहर के बुद्धिजीवियों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पोस्टर और होर्डिंग्स किसी भी राजनीतिक दल की अंदरूनी स्थिति का संकेत भी देते हैं। ऐसे में यदि किसी जनप्रतिनिधि को प्रचार सामग्री से पूरी तरह दूर रखा जाता है तो स्वाभाविक रूप से उसके राजनीतिक मायने निकाले जाते हैं।
कुछ लोगों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र में राहुल गांधी आ रहे हैं, उसी क्षेत्र के विधायक की तस्वीर यदि स्वागत द्वार से गायब हो जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। आखिर यह भूल है, रणनीति है या फिर संगठन के भीतर चल रही किसी खींचतान का संकेत?
हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के कई पदाधिकारी इसे सामान्य आयोजन संबंधी प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल से पहले इस तरह के घटनाक्रम संगठनात्मक एकजुटता पर भी प्रश्नचिह्न लगा सकते हैं। यदि यह वास्तव में चूक है तो पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए, और यदि इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश है तो वह भी समय के साथ सामने आ जाएगा।
फिलहाल राहुल गांधी की रैली से पहले अल्मोड़ा में मुद्दा विकास, संगठन या राजनीतिक रणनीति का नहीं, बल्कि पोस्टर पॉलिटिक्स का बन गया है। अब सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि आखिर स्थानीय विधायक की तस्वीर और नाम स्वागत सामग्री से क्यों गायब रहा।




