अल्मोड़ा, उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा द्वारा शनिवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी पत्रकारिता की लगभग दो सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके सामाजिक योगदान तथा वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी एवं कुमाउनी के प्रख्यात साहित्यकार तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. देव सिंह पोखरिया रहे।
प्रेस क्लब सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. पोखरिया ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज के जागरण, स्वतंत्रता आंदोलन तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना का सशक्त माध्यम रहा है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कानपुर से पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी और आज यह यात्रा दो शताब्दियों के करीब पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन भले ही 79 अंकों तक सीमित रहा, लेकिन उसने हिंदी पत्रकारिता की ऐसी नींव रखी, जिसने आगे चलकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उस दौर में संसाधनों की कमी के बावजूद पत्रकारों और संपादकों ने समाज को जागरूक बनाने का कार्य किया।
प्रो. पोखरिया ने पत्रकारिता के विकासक्रम को बताते हुए कहा कि 14वीं शताब्दी में प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से शुरू हुई सूचना क्रांति ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में पत्रकारिता को नई दिशा दी। हिंदी पत्रकारिता ने न केवल जनभावनाओं को अभिव्यक्ति दी, बल्कि भाषा के विकास और परिमार्जन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने महावीर प्रसाद द्विवेदी सहित अनेक विद्वानों और संपादकों को याद करते हुए कहा कि हिंदी भाषा को परिष्कृत स्वरूप प्रदान करने में पत्रकारिता का बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय क्षेत्र ने भी हिंदी पत्रकारिता की इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘अल्मोड़ा अखबार’, ‘शक्ति’, ‘स्वाधीन प्रजा’ और ‘समता’ जैसे समाचार पत्रों ने न केवल स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाया, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनचेतना को भी मजबूत किया।
प्रो. पोखरिया ने कहा कि वर्तमान समय सोशल मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता का युग है। आज पत्रकारों के पास अभिव्यक्ति के अनेक मंच उपलब्ध हैं, जिससे हिंदी पत्रकारिता का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और त्वरित सूचना के दौर में पत्रकारों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने पत्रकारों से तथ्यपरक, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड प्रेस क्लब के अध्यक्ष जगदीश जोशी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने हमेशा जनता की आवाज को बुलंद किया है। बदलते समय और चुनौतियों के बावजूद पत्रकारों का दायित्व है कि वे जनपक्षीय पत्रकारिता की परंपरा को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज को सही दिशा देना और लोकतंत्र को मजबूत करना है।
प्रेस क्लब के सचिव अशोक पांडे ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी पत्रकारिता दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम है।
विचारगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकारों और पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल मीडिया की चुनौतियों तथा विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता की मूल भावना सत्य, निष्पक्षता और जनहित की रक्षा करना है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार पी.सी. तिवारी, सुरेश तिवारी, हरीश चंद्र भंडारी, संतोष बिष्ट, कपिल मल्होत्रा, किशन जोशी, संजय अग्रवाल, अमित उप्रेती, रोहित भट्ट, दिनेश भट्ट, जगजीवन सिंह बिष्ट, हर्षवर्धन पांडे, शुभम जोशी, दयाकृष्ण कांडपाल और हेमराज सिंह चौहान सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।
हिंदी पत्रकारिता ने लोकतंत्र को दी मजबूती, सामाजिक सरोकारों को बनाया पहचान : प्रो. देव सिंह पोखरिया
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