
जल प्रदूषण, पेयजल संकट और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध होने के आरोप; अगली सुनवाई अगले सप्ताह संभावित
खबर सत्यवार्ता संवाददाता
अल्मोड़ा।
अल्मोड़ा जनपद की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी से जुड़े एक गंभीर पर्यावरणीय मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। बिमोला गांव निवासी प्रकाश चंद्र जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कथित तौर पर अवैध कार्यों में संलिप्त व्यक्ति को मामले में पक्षकार बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश को स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिका में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि कोसी डैम के समीप बड़े पैमाने पर अवैध मलवा डंपिंग और अवैध कटान किया जा रहा है। इससे न केवल कोसी नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, बल्कि नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से अल्मोड़ा शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि कोसी नदी इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख जल स्रोत है।
प्रकाश चंद्र जोशी ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि अवैध मलवा डालने के कारण नदी के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे बाढ़ और जलभराव की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसके अतिरिक्त, संबंधित क्षेत्र में सार्वजनिक मार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे अवैध गतिविधियां लगातार जारी रहीं। प्रशासन की इसी कथित उदासीनता के चलते याचिकाकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
माननीय उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी उल्लंघन करती हैं। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उस व्यक्ति को, जिसके ऊपर अवैध मलवा डंपिंग और कटान के आरोप लगाए गए हैं, मामले में पक्षकार बनाए जाने का निर्देश दिया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि संबंधित पक्ष भी अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रख सके और मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो सके। यह आदेश इस मामले में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मामले के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया और यह बताया कि किस प्रकार अवैध गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के दौरान प्रभाकर जोशी और भूपेश सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार, नदियों में अवैध रूप से मलवा डालने से जल की गुणवत्ता खराब होती है और जलीय जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आने से भू-क्षरण और बाढ़ जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
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कोसी नदी अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल पेयजल का प्रमुख स्रोत है, बल्कि कृषि और अन्य आवश्यकताओं के लिए भी इस पर निर्भरता है। ऐसे में इस नदी के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सीधे तौर पर जनजीवन को प्रभावित करती है।
इस मामले को लेकर अब क्षेत्र में जागरूकता भी बढ़ रही है और लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जो अगले सप्ताह होने की संभावना है। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय इस मामले में ठोस दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिससे न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।
फिलहाल, यह मामला पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक जिम्मेदारी और जनहित से जुड़ा एक अहम मुद्दा बन चुका है, जिस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें बनी हुई हैं।




