अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर निगम के समस्त पार्षदों ने जिला योजना समिति की बैठक से पूर्व सदस्यों का चयन नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। पार्षदों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना जिला योजना बैठक आयोजित करना उचित नहीं है।
नगर निगम के पार्षदों ने संयुक्त रूप से कहा कि जिला योजना समिति की बैठक जनता की समस्याओं, विकास कार्यों एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच होती है। ऐसे में यदि नगर निकायों के प्रतिनिधियों को उचित अवसर नहीं दिया जाएगा तो आम जनता की आवाज प्रभावी ढंग से योजना में शामिल नहीं हो पाएगी।
पार्षदों ने कहा कि भारत के संविधान में 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने का प्रावधान किया गया है। इसी व्यवस्था के अंतर्गत जिला योजना समिति में नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है ताकि शहरी क्षेत्रों की समस्याओं और विकास योजनाओं को प्राथमिकता के साथ रखा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सदस्यों का चयन किए बिना बैठक आयोजित करना संवैधानिक व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।
पार्षदों का कहना था कि जिला योजना समिति केवल औपचारिक बैठक नहीं होती, बल्कि यह जिले के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। यहां सड़कों, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव रखे जाते हैं। यदि पार्षदों की भागीदारी सीमित कर दी जाएगी तो स्थानीय समस्याएं पूरी गंभीरता से सामने नहीं आ पाएंगी।
उन्होंने कहा कि नगर निगम के पार्षद सीधे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और वे अपने-अपने वार्डों की समस्याओं से भली-भांति परिचित रहते हैं। ऐसे में जिला योजना में उनकी सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। पार्षदों ने मांग की कि बैठक से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर सदस्यों का चयन किया जाए, जिससे सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।
इस दौरान पार्षदों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से ही संभव है। यदि निर्णय प्रक्रिया में निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाएगा तो जनता के विश्वास को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो और सभी प्रक्रियाओं को नियमानुसार पूरा किया जाए।
पार्षदों ने प्रदेश सरकार एवं संबंधित विभागों से भी हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने धन सिंह रावत से इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए नगर निगम प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि जिला योजना समिति में पार्षदों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि विकास योजनाएं जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।
बैठक के दौरान पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि नगर निगम क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपने प्रतिनिधि के रूप में चुना है और वे जनता की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से है।
इस अवसर पर पार्षद दीपक कुमार, अंजू बिष्ट, वैभव पांडे, अनूप भारती, इंतखाब आलम कुरेशी, प्रदीप कुमार, कुलदीप मेरे एवं गुंजन सिंह चमयाल सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर प्रशासन से शीघ्र उचित निर्णय लेने की मांग की।
जिला योजना बैठक से पहले सदस्य चयन न होने पर अल्मोड़ा नगर निगम के पार्षद नाराज
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