धारा 183 के तहत दर्ज बयानों को न्यायालय में पेश करने के निर्देश, राज्य सरकार को दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश
नैनीताल। गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी की एफआईआर निरस्त करने की मांग को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183 के तहत दर्ज बयानों को न्यायालय के अभिलेख पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका संख्या WPCRL/2167/2026 के तहत विचाराधीन इस मामले में 30 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संबंधित बयानों और दस्तावेजों को तलब किया। अदालत ने राज्य सरकार को इन दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 नवंबर 2026 निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता उपस्थित रहे। प्रतिवादी संख्या तीन की ओर से भी अधिवक्ता ने न्यायालय में अपना पक्ष रखा।
न्यायालय के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को धारा 183 के अंतर्गत दर्ज बयानों की प्रतियां अदालत में प्रस्तुत करनी होंगी। इन दस्तावेजों के न्यायालय के समक्ष आने के बाद मामले की आगे की सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा बयान एवं संस्वीकृति दर्ज किए जाने का प्रावधान है। आपराधिक मामलों में इस प्रक्रिया के तहत दर्ज बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल उच्च न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी, जिसमें राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।
पप्पू गिरधारी की एफआईआर निरस्त करने की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 3 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
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