मल्ला महल में उत्तराखंड की लोक विधाओं के साथ हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान, बंगाल, गुजरात और पंजाब की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
अल्मोड़ा। ऐतिहासिक मल्ला महल में आयोजित सात दिवसीय जय गोल्ज्यू महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या लोक कला, लोक संगीत और देश की सांस्कृतिक विविधता के नाम रही। उत्तराखंड की पारंपरिक लोक विधाओं से लेकर विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों तक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्कूली बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों, वरिष्ठ लोक गायक नैन नाथ रावल की गायकी और बॉलीवुड गायक विकास भारद्वाज के गीतों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
महोत्सव का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार सांस्कृतिक एवं पर्यावरण समिति के संयुक्त सौजन्य से किया जा रहा है। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य लोक संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को साझा मंच प्रदान करना है।
ढोल-दमाऊं की गूंज पर थिरके दर्शक
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूली बच्चों की आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ। नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और उत्साह से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को दर्शाती छोलिया नृत्य, वैर और भगनौल की प्रस्तुतियां हुईं। ढोल-दमाऊं की गूंज और पारंपरिक लोक धुनों ने माहौल को पहाड़ की सांस्कृतिक रंगत से भर दिया।
वरिष्ठ लोक गायक नैन नाथ रावल ने अपनी सुरीली आवाज में लोक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को लोक संगीत की मधुर अनुभूति कराई। वहीं, बॉलीवुड गायक विकास भारद्वाज ने सायंकालीन कार्यक्रम में अपनी गायकी से समां बांध दिया। उनके गीतों पर दर्शकों ने खूब आनंद लिया और सांस्कृतिक संध्या संगीतमय हो उठी।
छह राज्यों की लोक संस्कृतियों का संगम
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात और पंजाब से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य के माध्यम से अपने-अपने राज्यों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देश की विविध लोक परंपराओं को करीब से जानने और समझने का अवसर दिया।
सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रहा महोत्सव
विभिन्न राज्यों के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का संदेश दिया। अलग-अलग भाषाओं, वेशभूषाओं और परंपराओं के बावजूद लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोती हैं।
ऐतिहासिक मल्ला महल में आयोजित यह महोत्सव अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा देने के साथ स्थानीय कलाकारों और युवा प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान कर रहा है। ऐसे आयोजन पारंपरिक लोक विधाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जय गोल्ज्यू महोत्सव-2026 लोक संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है।
जय गोल्ज्यू महोत्सव में लोक संस्कृति की छटा, देशभर के कलाकारों ने बांधा समां
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