प्रथम दिवस स्व. किशन गुरुरानी को दी गई श्रद्धांजलि, नन्हे कलाकारों की सरस्वती वंदना ने मोहा मन
अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा और कुमाऊं की प्राचीन एवं ऐतिहासिक रामलीला परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री नंदादेवी रामलीला कमेटी की रामलीला के प्रथम दिवस रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। रावण के अत्याचार, देवगण स्तुति, भगवान श्रीराम के जन्म और माता सीता के जन्म की लीलाओं ने दर्शकों को भक्तिभाव से सराबोर कर दिया। कलाकारों के अभिनय, संवाद और गायन के साथ रामलीला का शुभारंभ धार्मिक वातावरण में हुआ।
स्व. किशन गुरुरानी को श्रद्धांजलि अर्पित
प्रथम दिवस की रामलीला प्रारंभ होने से पूर्व कमेटी के संरक्षक एवं वरिष्ठ व्यवसायी स्वर्गीय किशन गुरुरानी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान रामलीला मंचन में उनके द्वारा दिए गए सहयोग और योगदान को स्मरण किया गया। कमेटी के सदस्यों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
रामलीला के प्रथम दिवस का उद्घाटन कमेटी के संयोजक, वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व पालिका सभासद प्रकाश पांडे तथा पूर्व नगरपालिका सभासद जीवन नाथ वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद श्रीराम स्तुति के साथ रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ।
नन्हे कलाकारों ने प्रस्तुत की सरस्वती वंदना
रामलीला की मुख्य लीलाओं से पूर्व छोटे-छोटे बच्चों ने सरस्वती वंदना का मनमोहक मंचन किया। सरस्वती के पात्र का अभिनय जीविका ने किया। वहीं हर्षिता पांडे, मानवी बोरा, नीतू मावड़ी, कनिष्का पांडे, सृष्टि उप्रेती, वेदांशी गोस्वामी और छवि पांडे ने सरस्वती वंदना में अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
बच्चों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में नन्हे कलाकारों की सहभागिता को भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष एवं लाला बाजार वार्ड के पार्षद कुलदीप सिंह मेर तथा रामलीला कमेटी के वरिष्ठ सदस्य महेंद्र सिंह बिष्ट ने अतिथियों को राम प्रसादी भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कमेटी के सचिव एवं नंदादेवी वार्ड के पार्षद अर्जुन सिंह बिष्ट ने किया।
कलाकारों ने निभाए रामायण के प्रमुख पात्र
प्रथम दिवस की लीला में कलाकारों ने रामायण के विभिन्न पात्रों का प्रभावशाली अभिनय किया। रावण के पात्र में हरि विनोद साह, देवगण के रूप में संजय जोशी, द्रोण नेगी, अविरल जोशी और आदित्य गुरुरानी तथा ब्रह्मा के पात्र में हिमांशु परगाई ने अभिनय किया। रावण दूत की भूमिका मुरलीधर कांडपाल ने निभाई, जबकि मुनि के पात्र में राजेंद्र रौतेला नजर आए।
राजा दशरथ का अभिनय द्रोण नेगी ने तथा राजा जनक की भूमिका अविरल जोशी ने निभाई। बाल राम के पात्र में तविषा साह और बालिका सीता के पात्र में सृष्टि उप्रेती ने अभिनय किया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रारंभिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया।
रामलीला के संगीत पक्ष में हारमोनियम पर राजन नयाल और तबले पर शेखर सिजवाली ने सहयोग प्रदान किया। पात्रों का मेकअप दानिश और राजू शर्मा ने किया। मंच पूजन नंदादेवी मंदिर के मुख्य पुजारी तारा दत्त जोशी और जीवन पाठक ने संपन्न कराया। रामलीला मंचन का सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण नमन बिष्ट द्वारा किया गया, जिससे कार्यक्रम को ऑनलाइन देखने वाले दर्शकों तक भी पहुंचाया गया।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में नंदादेवी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मनोज वर्मा, मंदिर समिति के उपाध्यक्ष एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अनिल सनवाल, हरीश बिष्ट, अतुल वर्मा, संदीप साह, दीपक वर्मा, महेंद्र बिष्ट, राजकुमार बिष्ट, राजेश पलनी, जगदीश बिष्ट, गणेश मेर, अमरनाथ सिंह नेगी, कविश अरोरा, धनंजय साह, चंद्रमोहन परगाई, संजय साह, परितोष जोशी, जगदीश भंडारी, शशि मोहन पांडे, पूनम पाठक, संगीता पांडे, हर्षवर्धन पांडे, अमित उप्रेती, लोकेश तिवारी, आयुष वर्मा, मानवेंद्र साह, वरुण साह और सुमित साह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
श्री नंदादेवी रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित यह रामलीला अल्मोड़ा की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा न केवल भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाती है, बल्कि स्थानीय रंगमंच, संगीत और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित करती है।
रामलीला के प्रथम दिवस हुए मंचन ने आगामी लीलाओं के प्रति दर्शकों में उत्सुकता जगाई। आयोजन के माध्यम से मर्यादा, धर्म, सत्य और आदर्श जीवन के संदेश को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। नन्हे कलाकारों की सहभागिता और वरिष्ठ सदस्यों के योगदान से यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।




