रामनगर। कुमाऊँ क्षेत्र के ग्रामीण उपभोक्ताओं पर किए गए एक शोध में सामने आया है कि मोबाइल कॉमर्स अब केवल ऑनलाइन खरीद-बिक्री और डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण समाज के सामाजिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
शोध के अनुसार मोबाइल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार की जानकारी, वित्तीय लेन-देन, सामाजिक संपर्क और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। हालांकि कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता की कमी, लागत, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और डिजिटल सेवाओं की जटिलता इसके व्यापक विस्तार में प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं।
शोध में सुझाव दिया गया है कि ग्रामीण डिजिटल विकास के लिए केवल इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना, सरल एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं, डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित डिजिटल भुगतान तथा सरकारी सेवाओं का मोबाइल माध्यमों से बेहतर एकीकरण जरूरी है। ग्राम स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण, स्थानीय भाषा में सेवाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर डिजिटल पहुंच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मोबाइल कॉमर्स के माध्यम से वित्तीय सेवाओं, सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार के अवसरों तक पहुंच बढ़ने से ग्रामीण नागरिकों के समय और लागत में कमी के साथ वित्तीय समावेशन एवं आजीविका के अवसर भी मजबूत हो सकते हैं। विशेष रूप से पर्वतीय और सीमित अवसंरचना वाले क्षेत्रों में यह अध्ययन “डिजिटल पहुंच” से आगे बढ़कर “डिजिटल सशक्तिकरण” और “डिजिटल सुशासन” की दिशा में नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।
रमेरिका ओप्लीगर ने अपना शोधकार्य प्रो. सी.एस. जोशी, अध्यक्ष, वाणिज्य विभाग, पी.एन.जी.पी.जी. कॉलेज, रामनगर के निर्देशन में पूर्ण किया। उनकी उपलब्धि पर प्रो. अतुल जोशी, विभागाध्यक्ष एवं डीन वाणिज्य, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल; प्रो. आर.सी. डंगवाल, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन वाणिज्य, हे.न.ब. केंद्रीय विश्वविद्यालय, गढ़वाल; प्रो. एम.सी. पाण्डे, प्राचार्य, पी.एन.जी.पी.जी. कॉलेज तथा प्रो. एन.एस. बनकोटी, प्राचार्य, एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी सहित उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षाविदों ने बधाई दी और शोध को उल्लेखनीय बताया।
शोध से संबंधित छह शोध-पत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। रमेरिका ओप्लीगर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों और गुरुजनों को दिया।
रमेरिका ओप्लीगर का शोध: मोबाइल कॉमर्स ग्रामीण सशक्तिकरण का नया माध्यम
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