
अल्मोड़ा:
जनपद अल्मोड़ा में निजी विद्यालयों की बढ़ती मनमानी और अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ के खिलाफ अब आवाज मुखर होने लगी है। इसी क्रम में हल्द्वानी से पहुंचे शिक्षा सत्याग्रह के संयोजक दीप पांडे तथा अल्मोड़ा के अधिवक्ता वैभव जोशी ने शहर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सरकार से सख्त नियामक कानून बनाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि की जा रही है। इसके साथ ही अभिभावकों पर विशेष दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार के अतिरिक्त शुल्कों के नाम पर भी अभिभावकों का लगातार शोषण किया जा रहा है।
शिक्षा सत्याग्रह के संयोजक दीप पांडे ने कहा कि “शिक्षा एक सेवा का माध्यम है, न कि व्यवसाय का साधन। वर्तमान में शिक्षा के नाम पर खुलेआम व्यावसायीकरण हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने सरकार से मांग की कि एक स्पष्ट, पारदर्शी और सख्त कानून बनाया जाए, जिससे निजी स्कूलों की फीस संरचना नियंत्रित हो सके और अभिभावकों को राहत मिल सके।
वहीं अधिवक्ता वैभव जोशी ने कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन केवल अल्मोड़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में व्यापक रूप से फैलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह भी मांग की कि निजी विद्यालयों की वित्तीय गतिविधियों का नियमित ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्कूल किस आधार पर फीस वृद्धि कर रहे हैं। इसके अलावा प्रत्येक जिले में एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने की भी मांग की गई, जो निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, शुल्क निर्धारण और अन्य गतिविधियों पर नजर रख सके।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अभिभावकों से भी इस मुहिम में जुड़ने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक अभिभावक एकजुट नहीं होंगे, तब तक इस तरह की मनमानी पर रोक लगाना कठिन होगा।
यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय अभिभावकों और जागरूक नागरिकों का भी समर्थन देखने को मिला। लोगों ने इस पहल को जनहित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए प्रदेश स्तर पर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।



