अल्मोड़ा। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग जागेश्वर धाम की सुरक्षा, पवित्रता और व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की मांग को लेकर मुख्य पुजारी एवं महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज (कैलाश चन्द्र भट्ट) ने तहसीलदार एवं कार्यवाहक प्रबंधक, मंदिर प्रबंधन समिति जागेश्वर को एक विस्तृत जन-सुझाव पत्र सौंपा है। इस पत्र में धाम की धार्मिक गरिमा, श्रद्धालुओं की सुविधा, पुजारियों की सुरक्षा तथा मंदिर प्रबंधन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
पत्र में कहा गया है कि जागेश्वर धाम उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। वर्षभर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाओं को समयानुकूल विकसित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
मुख्य पुजारी कैलाशानंद महाराज ने सबसे पहले धाम की पवित्रता बनाए रखने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्धारित क्षेत्र के आसपास शराब की बिक्री तथा अंडा, मीट और मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनी रहेगी तथा श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान मिलेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे मंदिर परिसर में अनुशासन और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।
ज्ञापन में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। वर्तमान में भीड़भाड़ के दौरान श्रद्धालुओं को अपने वाहनों की पार्किंग में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए बलढोटी मैदान को विकसित कर एक व्यवस्थित पार्किंग स्थल बनाने का सुझाव दिया गया है। इस संबंध में पूर्व में कुमाऊँ आयुक्त को भी ज्ञापन भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। कैलाशानंद महाराज ने कहा कि धाम में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। ऐसे में मंदिर परिसर में कम से कम चार पुलिस जवानों की स्थायी तैनाती की जानी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
पत्र में बारीदार पुजारियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि दैनिक पूजा-अर्चना के दौरान पुजारियों को वस्त्र परिवर्तन के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं है। इसलिए मंदिर परिसर में एक सुरक्षित एवं व्यवस्थित चेंजिंग रूम का निर्माण किया जाना आवश्यक है।
मुख्य पुजारी ने पुजारियों की सुरक्षा के लिए सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग की है। उन्होंने बताया कि कई पुजारियों के गांव मुख्य धाम से काफी दूरी पर स्थित हैं। रात की आरती के बाद उन्हें जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है, जहां वन्यजीवों विशेषकर बाघ का खतरा बना रहता है। ऐसे में आवागमन मार्गों पर सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित करना जरूरी है।
ज्ञापन में मंदिर प्रबंधन समिति के पुनर्गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों से प्रबंधन समिति का गठन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए जल्द से जल्द समिति का पुनर्गठन किया जाना चाहिए।
मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड लागू करने का सुझाव भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए मर्यादित एवं गरिमापूर्ण वस्त्र संहिता निर्धारित की जानी चाहिए ताकि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण हो सके।
इसके अतिरिक्त लंबे समय से सेवा दे रहे पुरोहितों को सहायक पुजारी के रूप में पंजीकृत करने की मांग भी रखी गई है। उनका कहना है कि इससे अनुभवी पुरोहितों को उचित पहचान मिलेगी तथा मंदिर व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित होगी।
कैलाशानंद महाराज ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से इन सभी सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यह केवल पुजारियों की मांग नहीं बल्कि श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और सनातन परंपराओं से जुड़े समाज की सामूहिक भावना है। यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है तो जागेश्वर धाम की गरिमा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
जागेश्वर धाम की गरिमा और व्यवस्थाओं को लेकर मुख्य पुजारी कैलाशानंद महाराज ने सौंपा जन-सुझाव पत्र
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