अल्मोड़ा। जिला अस्पताल के प्रस्तावित स्थानांतरण को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल स्थानांतरण को रोकने के मुद्दे पर अब कांग्रेस ने भाजपा के भीतर ही श्रेय लेने की होड़ और कथित अंदरूनी खींचतान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष यूथ ब्रिगेड सेवादल एवं पार्षद गुंजन सिंह चम्याल ने बयान जारी कर भाजपा नेताओं पर अस्पताल के मुद्दे को लेकर अलग-अलग दावे करने का आरोप लगाया है।
गुंजन सिंह चम्याल ने कहा कि जिला अस्पताल के स्थानांतरण को रुकवाने की बात सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस उपलब्धि का श्रेय किसके सिर बांधा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के एक नेता ने बयान जारी कर कहा कि वह मंत्री से मुलाकात कर आए हैं और उनके प्रयासों से अस्पताल का स्थानांतरण रुकवाया गया है। इसके तत्काल बाद दूसरे नेता की ओर से बयान सामने आया कि ऐसा नहीं है, बल्कि उन्होंने मंत्री से फोन पर बात कर इस मामले को रुकवाने की पहल की थी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद स्थिति ऐसी बन गई कि भाजपा के कई नेता मंत्री के दरबार में पहुंचकर अपने-अपने स्तर से पत्र सौंपने और मुलाकात करने लगे। सोशल मीडिया के माध्यम से भी नेता अपनी-अपनी उपलब्धियां जनता के सामने गिनाने में जुटे हुए हैं। चम्याल ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अस्पताल का मुद्दा जनहित से ज्यादा राजनीतिक श्रेय का विषय बनता जा रहा है।
उन्होंने भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि यदि वास्तव में अस्पताल स्थानांतरण का कोई आदेश था ही नहीं और कांग्रेस द्वारा इस संबंध में कही जा रही बातें भ्रामक थीं, जैसा कि भाजपा की ओर से पहले कहा गया था, तो फिर अब भाजपा के अलग-अलग नेताओं को मंत्री से मुलाकात कर पत्र देने और अस्पताल को स्थानांतरण से बचाने के प्रयासों का दावा करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
गुंजन सिंह चम्याल ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि आखिर वास्तविकता क्या है। यदि स्थानांतरण का कोई आदेश था ही नहीं, तो उसे रोकने की कवायद किस बात की थी? और यदि स्थानांतरण की प्रक्रिया चल रही थी, तो भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि इसे रोकने के लिए वास्तव में किस स्तर पर प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं के अलग-अलग बयानों से आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। एक ओर पहले यह कहा गया कि अस्पताल स्थानांतरण को लेकर कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है और ऐसा कोई आदेश अस्तित्व में नहीं है। दूसरी ओर अब भाजपा के नेता एक के बाद एक मंत्री से मुलाकात करने तथा अस्पताल स्थानांतरण रुकवाने में अपनी भूमिका का दावा कर रहे हैं।
चम्याल ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अब जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल को हटाने की प्रक्रिया शुरू किसने की और उसे रुकवाया किसने? यदि यह उपलब्धि है तो भाजपा पहले यह तय करे कि इसका श्रेय किस नेता को दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आ रही पोस्टों में भी भाजपा के अलग-अलग नेता अपनी भूमिका को प्रमुखता से सामने रख रहे हैं। कोई मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात का दावा कर रहा है तो कोई फोन पर हुई बातचीत को अस्पताल स्थानांतरण रोकने की वजह बता रहा है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वास्तविक प्रयास किसके द्वारा किए गए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जिला अस्पताल अल्मोड़ा की जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। इससे जुड़े किसी भी निर्णय का असर सीधे आम नागरिकों और मरीजों पर पड़ता है। ऐसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक श्रेय की लड़ाई का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल को लेकर सरकार और भाजपा को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने भाजपा से मांग की कि वह स्पष्ट रूप से बताए कि जिला अस्पताल के स्थानांतरण को लेकर सरकार का वास्तविक निर्णय क्या था, क्या स्थानांतरण का कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ था और यदि हुआ था तो उसे रोकने के लिए किस जनप्रतिनिधि अथवा नेता ने क्या पहल की।
गुंजन सिंह चम्याल ने कहा कि जनता को उपलब्धियों की सोशल मीडिया पोस्ट से ज्यादा स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल का स्थानांतरण वास्तव में रुक गया है तो यह अल्मोड़ा की जनता के हित में स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसका श्रेय लेने के बजाय भाजपा नेताओं को पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसे जनहित के विषय पर राजनीतिक बयानबाजी से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। भाजपा को आपसी श्रेय की राजनीति से ऊपर उठकर जनता को यह बताना चाहिए कि अस्पताल के संबंध में सरकार का अंतिम निर्णय क्या है और आगे की स्थिति क्या रहेगी।
उन्होंने दोहराया कि पहले भाजपा यह स्पष्ट करे कि आखिर जिला अस्पताल को हटाने की स्थिति बनी कैसे और यदि अब इसे रोका गया है तो इसका श्रेय किसे दिया जाए।
जिला अस्पताल स्थानांतरण रोकने को लेकर भाजपा में अंदरूनी खींचतान के आरोप, उपलब्धि का श्रेय लेने की होड़
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