देहरादून,
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में 4 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष और यादगार क्षण देखने को मिला। अल्मोड़ा की युवा, संवेदनशील एवं जागरूक साहित्यकार डॉ. माया गोला के पांचवें कविता संग्रह का भव्य लोकार्पण समारोह बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की।
लोकार्पण समारोह में राजधानी देहरादून के प्रख्यात साहित्यकारों—जितेन ठाकुर, गंभीर सिंह पालनी, धनेश दत्त पांडे, मुकेश नौटियाल, शशि भूषण बडोनी, रजनीश त्रिवेदी, राजेश पाल, प्रतिभा कटिहार, नवीन उपाध्याय और विजय मधुर सहित कई साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं। इसके अतिरिक्त श्रीमती चंद्रकला पालनी, प्रकाशक एम. एम. चंद्रा, आरिफा ऐविस, भारती मिश्रा, सारांश पालनी और धर्म सिंह फरस्वाण सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का माहौल साहित्यिक ऊर्जा और सृजनात्मकता से ओतप्रोत रहा। मंच पर उपस्थित सभी साहित्यकारों ने डॉ. माया गोला के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उनके नए कविता संग्रह को समकालीन हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक प्रकार के द्वंद्वों और चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे समय में संवेदनशील और विचारोत्तेजक कविताएं समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं।
लोकार्पण के पश्चात डॉ. माया गोला ने अपनी कविताओं का प्रभावी और भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविताओं में जीवन की जटिलताओं, प्रेम की गहराइयों, प्रकृति की सुंदरता, ब्रह्मांड के रहस्यों और मानव अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं का सशक्त चित्रण देखने को मिला। उनके काव्य पाठ के दौरान श्रोताओं ने कई बार तालियों की गूंज से उनका उत्साहवर्धन किया।
डॉ. माया गोला के इस नवीनतम कविता संग्रह में जीवन, प्रेम, प्रकृति, ब्रह्मांड, धरती, भारत, मानव, ईश्वर, जाति, धर्म, पूंजी और राष्ट्र जैसे विविध और व्यापक विषयों को समाहित किया गया है। यह संग्रह न केवल भावनात्मक स्तर पर पाठकों को छूता है, बल्कि सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी उन्हें सोचने के लिए प्रेरित करता है। उनकी कविताएं सरल भाषा में गहरी बात कहने की क्षमता रखती हैं, जो आम पाठकों से लेकर गंभीर साहित्य प्रेमियों तक सभी को आकर्षित करती हैं।
इस कविता संग्रह की एक विशेषता इसकी विस्तृत भूमिका और कविता के नए शिल्प का प्रयोग है, जो इसे समकालीन हिंदी कविता की धारा में अलग पहचान प्रदान करता है। आलोचकों का मानना है कि डॉ. माया गोला ने इस संग्रह के माध्यम से पारंपरिक काव्य शैलियों से आगे बढ़ते हुए नए प्रयोग किए हैं, जो साहित्य में नवीनता और ताजगी का संचार करते हैं।
गौरतलब है कि यह कविता संग्रह देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान “न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली” द्वारा प्रकाशित किया गया है। प्रकाशन के क्षेत्र में अपनी विश्वसनीयता और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध यह संस्थान लगातार उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। डॉ. माया गोला का यह संग्रह भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए साहित्य प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की धरती सदैव से ही साहित्य और संस्कृति की उर्वर भूमि रही है। यहां के साहित्यकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और डॉ. माया गोला भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी रचनाओं में पहाड़ की संवेदनाएं, संघर्ष और प्रकृति के साथ गहरा संबंध स्पष्ट रूप से झलकता है।
समारोह के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। राष्ट्रीय पुस्तक मेले के इस आयोजन ने न केवल पुस्तकों के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ावा दिया, बल्कि साहित्यकारों को अपने विचार साझा करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान किया।
डॉ. माया गोला का यह पांचवां कविता संग्रह निश्चित रूप से हिंदी साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा और आने वाले समय में पाठकों एवं आलोचकों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनेगा।
देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान डॉ. माया गोला के पांचवें कविता संग्रह का भव्य लोकार्पण
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