
पर्वतीय क्षेत्र में उद्यमिता विकास और स्थायी कृषि को बढ़ावा देने की पहल
अल्मोड़ा/बागेश्वर,
भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर, बागेश्वर द्वारा 19 से 25 फरवरी 2026 तक ग्रामीण युवाओं हेतु “पर्वतीय क्षेत्र में एग्रो–टूरिज्म : ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता विकास एवं स्थायी पर्वतीय कृषि हेतु एक उभरती अवधारणा” विषय पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 25 फरवरी को हुआ।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे वे पर्वतीय क्षेत्रों में एग्रो-टूरिज्म को स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित कर सकें।
मुख्य अतिथि ने बताई संभावनाएं
दिनांक 20 फरवरी को मुख्य अतिथि के रूप में भाकृअनुप-केन्द्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र मुक्तेश्वर, नैनीताल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरुण किशोर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में फल उत्पादन, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता एग्रो-टूरिज्म के लिए अपार संभावनाएं रखती हैं।
उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीति पर कार्य करने की सलाह दी, ताकि एग्रो-टूरिज्म को स्थायी आय के स्रोत के रूप में विकसित किया जा सके।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
विशिष्ट अतिथि राजकीय इंटर कॉलेज, काफलीगैर के प्रधानाचार्य श्री राजीव निगम ने ग्रामीण युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एग्रो-टूरिज्म आय वृद्धि के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी प्रभावी माध्यम है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और अपने क्षेत्र में स्वरोजगार के नए आयाम स्थापित करने का आह्वान किया।
शैक्षिक भ्रमण से मिला व्यावहारिक अनुभव
20 से 22 फरवरी तक प्रतिभागियों का शैक्षिक भ्रमण मुक्तेश्वर स्थित संस्थान में कराया गया, जहां विशेषज्ञों ने पर्सिमोन (काकू फल), लीची और कीवी की उन्नत उत्पादन तकनीक, पौध प्रबंधन और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी।
भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, पंतनगर भी ले जाया गया, जहां उन्होंने विभिन्न अनुसंधान इकाइयों, प्रसंस्करण इकाइयों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अवलोकन किया।
ऑनलाइन व्याख्यान और विशेष सत्र
कार्यक्रम के अंतर्गत ऑनलाइन माध्यम से संस्थान के वैज्ञानिकों ने कृषि के विभिन्न आयामों को एग्रो-टूरिज्म से जोड़कर अतिरिक्त आय सृजन के बारे में जानकारी दी। साथ ही बिन्सर वाइल्डलाइफ सेंचुरी से संबंधित एक विशेष व्याख्यान भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव
बागेश्वर जनपद से कुल 25 कृषकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया और कहा कि इससे उन्हें एग्रो-टूरिज्म आधारित उद्यमिता की दिशा में नई सोच और आत्मविश्वास मिला है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री नीरज जोशी, श्री मनोज कुमार, डॉ. राजेश कुमार मीणा, श्री महेश सिंह, श्री सौरभ सिंह एवं श्री बहादुर सिंह सहित अन्य सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।


