
अल्मोड़ा।
रानीधारा क्षेत्र के सीमेंट कोठी परिसर में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा पिंजरा स्थापित किया गया। पिंजरा लगाए जाने के दौरान क्षेत्रीय पार्षद आशा बिष्ट, अमित साह ‘मोनू’, अरुण पंत, जे.एस. रौतेला तथा विजय तिवारी मौजूद रहे। इस अवसर पर वन विभाग की ओर से संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की।
वन विभाग की टीम में अमित सिंह भैसोड़ा (अनुभाग अधिकारी), ऋषभ सेमवाल (वन दरोगा), भास्कर नाथ महंत (वन दरोगा), विवेक तिवारी (वन रक्षक), राहुल मनराल (वन रक्षक), नीरज नेगी (क्यूआरटी सदस्य) तथा मनोज जोशी सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। विभागीय टीम ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पिंजरे की स्थापना की और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।
स्थानीय निवासियों ने हाल के दिनों में जंगली जानवरों की आवाजाही की शिकायतें की थीं, जिससे जन-धन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रानीधारा सीमेंट कोठी क्षेत्र को चिन्हित किया और पिंजरा लगाने का निर्णय लिया। पिंजरे की स्थापना का उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे को नियंत्रित करना और वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना है।
पार्षद आशा बिष्ट ने कहा कि क्षेत्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वन विभाग द्वारा की गई यह पहल सराहनीय है। उन्होंने विभाग से नियमित निगरानी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाने की अपील की। अमित साह ‘मोनू’ और अरुण पंत ने भी वन विभाग के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर ही इस तरह की समस्याओं का स्थायी समाधान कर सकते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिंजरे पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और यदि कोई वन्यजीव इसमें फंसता है तो उसे विशेषज्ञों की देखरेख में सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों और विभागीय कर्मचारियों ने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आपसी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल पर संतोष जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि इससे क्षेत्र में भय का माहौल कम होगा और जनजीवन सामान्य रहेगा।


