
अल्मोड़ा।
रानीधारा क्षेत्र में बाघ की लगातार सक्रियता और ग्रामीणों में बढ़ती दहशत को देखते हुए वन विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए सीमेंट कोठी के पास बाघ पकड़ने के लिए पिंजरा स्थापित किया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय पार्षद आशा बिष्ट की पहल और लगातार प्रयासों के बाद संभव हो सकी।
पार्षद आशा बिष्ट ने बताया कि बीते कुछ दिनों से रानीधारा और आसपास के इलाकों में बाघ की आवाजाही की सूचना मिल रही थी, जिससे स्थानीय लोग भयभीत थे। खासकर सुबह-शाम आवागमन करने वाले नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। इस संबंध में वन विभाग को अवगत कराते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी।
वन विभाग द्वारा मामले की गंभीरता को समझते हुए मौके पर टीम भेजी गई और सीमेंट कोठी के समीप रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया गया। पिंजरा लगाए जाने के दौरान पार्षद भूपेंद्र जोशी, मोहन राम आर्या सहित स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
वन विभाग की ओर से वन क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र सिंह नेगी ने बताया कि क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पिंजरा सुरक्षित स्थान पर लगाया गया है और क्यूआरटी टीम को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक रूप से जंगल की ओर न जाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
इस दौरान वन दरोगा अमित सिंह भैसोड़ा, वन दरोगा विवेक तिवारी, वन बीट अधिकारी कविता, क्यूआरटी श्रमिक नीरज नेगी और मनोज जोशी भी मौके पर मौजूद रहे। टीम द्वारा क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
स्थानीय लोगों ने पार्षद आशा बिष्ट और वन विभाग का आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल बनेगा और बाघ की समस्या से जल्द निजात मिलेगी।



