
संत निरंकारी मिशन का संत समागम आयोजित
सच्चा गुरु ईश्वरी साक्षात्कार की सीढ़ी : नैपाल सिंह
अल्मोड़ा। दया, करुणा, प्रेम, ज्ञान और सेवा भाव ही सच्चे अर्थों में मनुष्य होने के प्रमुख गुण हैं। निष्काम भाव से, बिना आडंबर के जरूरतमंदों की सेवा करना ही भगवान की सच्ची आराधना है। यह विचार संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए मिशन के केंद्रीय ज्ञान प्रचार प्रमुख नैपाल सिंह ने व्यक्त किए।
रैमजे इंटर कॉलेज में आयोजित समागम में उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु अपने भक्तों में दैवीय गुणों का सृजन कर उन्हें ईश्वर तक पहुँचने की राह दिखाता है। उन्होंने कहा कि केवल शरीर से मनुष्य होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मनुष्यता के गुणों से परिपूर्ण होना अधिक महत्वपूर्ण है। दया, करुणा, प्रेम, ज्ञान और शिक्षा ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग पहचान देते हैं।
नैपाल सिंह ने कहा कि इस समागम का मूल संदेश मानवता, प्रेम और भाईचारा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के समय में विश्व को सबसे अधिक आवश्यकता मानवता, शांति और आपसी सद्भाव की है, जिसे केवल परमात्मा के बोध से ही प्राप्त किया जा सकता है।
मिशन के प्रचारक चौधरी ने मानव को अपने मूल अस्तित्व की पहचान कर पूर्णत्व की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मा परमात्मा का अंश है, इसलिए हर जीव में, चाहे वह मनुष्य हो या अन्य प्राणी, परमात्मा की शक्ति विद्यमान है। जब मनुष्य परम पिता परमात्मा को जान लेता है, तभी उसके जीवन में सच्चे अर्थों में प्रेम, शांति और सद्भाव के गुण विकसित होते हैं।
समागम में भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की गई।
कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद जोशी, स्थानीय संयोजक राम प्रकाश निरंकारी, खीम सिंह रैकुनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे।


