
ऐतिहासिक मल्ला महल परिसर में 36वें होली महोत्सव का रंगारंग आगाज़
अल्मोड़ा। नगर के ऐतिहासिक मल्ला महल परिसर में महिला कल्याण संस्था अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 36वें दो दिवसीय होली महोत्सव प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हर्षोल्लास और पारंपरिक रंगारंग माहौल के बीच संपन्न हुआ। कुमाऊं की लोकसंस्कृति और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता यह आयोजन वर्षों से नगर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व विधायक कैलाश शर्मा एवं श्रीमती अंजली शर्मा, महापौर नगर निगम अल्मोड़ा अध्यक्ष अजय वर्मा, त्रिलोक लटवाल, अखिलेश थापा, मनमोहन चौधरी, बंसल जी लटवाल, कपिल मल्होत्रा तथा विशिष्ट अतिथियों महिला कल्याण संस्था की अध्यक्ष रीता दुर्गापाल, मीता उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही समूचा परिसर ‘होली है!’ के उल्लासपूर्ण नारों से गूंज उठा।
पारंपरिक स्वागत से महका वातावरण
इस अवसर पर संस्था की महिलाओं ने सभी अतिथियों का अबीर-गुलाल का टीका लगाकर तथा पारंपरिक कुमाऊंनी टोपी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। वातावरण में रंग, उल्लास और सांस्कृतिक उत्साह की अनोखी छटा बिखरी रही। दर्शकों की भारी भीड़ ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
महिला कल्याण संस्था की अध्यक्ष रीता दुर्गापाल ने स्वागत संबोधन में कहा कि 36 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह होली महोत्सव न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि हमारी लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त मंच भी है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
12 महिला दलों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
पहले दिन आयोजित होली गायन, वादन, नृत्य और स्वांग प्रतियोगिता में स्थानीय महिलाओं के 12 दलों एवं संस्थाओं ने प्रतिभाग किया। इनमें त्रिपुरा सुंदरी महिला समिति, देवी मंदिर खत्याड़ी, कोकिला महिला सांस्कृतिक समिति माल गांव, मां जगदंबा टीम धारानौला, कुमाऊंनी सांस्कृतिक टीम स्यूनरा कोट, मां दुर्गा समिति दुगाल खोला, मां दुर्गा शक्ति टीम लक्ष्मी इंद्रा कॉलोनी, महिला शक्ति ग्रुप हीर स्टेडियम, आंचल देवी न्यू कॉलोनी सदस्य, नीलकंठ सत्संग समिति, दीपालय समूह दुगाल खोला अल्मोड़ा तथा कला संगम संस्कृति ग्रुप अल्मोड़ा शामिल रहे।
सभी प्रतिभागी दलों ने कुमाऊंनी पारंपरिक बैठकी और खड़ी होली की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। होली गीतों की मधुर तान, ढोलक और हारमोनियम की थाप के साथ स्वांग की हास्य-व्यंग्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई प्रस्तुतियों में सामाजिक संदेश भी निहित थे, जिनमें नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और महिला शिक्षा जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रतिभागी महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं ने कहा कि यह मंच उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करता है।
36 वर्षों से सशक्त परंपरा
उल्लेखनीय है कि महिला कल्याण संस्था अल्मोड़ा पिछले 36 वर्षों से इस होली महोत्सव का सफल आयोजन करती आ रही है। समय के साथ आयोजन का स्वरूप और व्यापक हुआ है। अब इसमें कुमाऊं अंचल के विभिन्न जनपदों से महिला होल्यार अपनी-अपनी सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ प्रतिभाग करती हैं।
यह महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कुमाऊं की सांस्कृतिक एकता और महिला शक्ति का प्रतीक बन चुका है। संस्था की सक्रिय सदस्य पुष्पा सती, ममता चौहान, अनीता रावत, चन्द्रा अग्रवाल, आशा पंत, दीपा, गीता साह, राधिका जोशी, रमा जोशी एवं सतीश जोशी सहित समस्त सदस्यों का आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा।
निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन
कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में नैनीताल से रंगकर्मी बृजमोहन जोशी, अल्मोड़ा से चंचल तिवारी, डॉ. ललित मोहन जोशी एवं नवीन बिष्ट शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन गायन शैली, ताल-लय, मंच संचालन, परिधान एवं विषयवस्तु के आधार पर किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन मीता उपाध्याय एवं पुष्पा सती द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सहज, रोचक और अनुशासित बनाए रखा।
दूसरे दिन महिला होलिकोत्सव और सांस्कृतिक जुलूस
दूसरे दिन महिला कल्याण संस्था द्वारा भव्य महिला होलिकोत्सव एवं सांस्कृतिक जुलूस का आयोजन किया गया। कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला सांस्कृतिक टीमों ने पारंपरिक वेशभूषा में नगर में आकर्षक जुलूस निकाला। ढोल-दमाऊं और होली गीतों की स्वर लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवी हो उठा।
इसके पश्चात आयोजित प्रतियोगिता में कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों की टीमों सहित अल्मोड़ा की कुल 10 टीमों ने भाग लिया। सभी टीमों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर निर्णायकों और दर्शकों का दिल जीत लिया।
प्रतियोगिता के परिणाम घोषित करते हुए निर्णायक मंडल ने प्रथम स्थान भवाली की टीम मां नंदा सुनंदा को प्रदान किया। द्वितीय स्थान अल्मोड़ा की टीम कला संस्कृति संगम ग्रुप को तथा तृतीय स्थान अल्मोड़ा की ही टीम कुमाऊं संस्कृति टीम को मिला। विजेता टीमों को स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
लोकसंस्कृति संरक्षण की मिसाल
इस दो दिवसीय आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि कुमाऊं की लोकसंस्कृति आज भी महिलाओं के सशक्त प्रयासों से जीवंत और सशक्त बनी हुई है। मल्ला महल परिसर में गूंजते होली गीतों ने न केवल परंपरा को सहेजा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।
अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया गया। रंग, उमंग और सांस्कृतिक एकता के इस महोत्सव ने अल्मोड़ा की फिजाओं को पूरी तरह होलीमय कर दिया।





