
अल्मोड़ा/द्वाराहाट, एरासेरा गांव (द्वाराहाट) में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के तत्वावधान में 13 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना – कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के अंतर्गत संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता से अवगत कराना तथा सोयाबीन आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों की जानकारी देना रहा। प्रशिक्षण में गांव के कुल 21 किसानों (15 महिलाएं एवं 6 पुरुष) ने भाग लिया।
सोयाबीन से मूल्यवर्धित उत्पादों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सोयाबीन से टोफू (सोयापनीर), सोया दूध एवं सोया बड़ी बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं इन उत्पादों को तैयार कर तकनीक को सीखा। साथ ही, सोयाबीन से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की विधि संबंधी लीफलेट (पर्चे) भी वितरित किए गए, ताकि किसान भविष्य में इन तकनीकों को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
कृषि यंत्रों की जानकारी पर विशेष जोर
कार्यक्रम में मंडुवा (रागी) थ्रेशर और धान थ्रेशर की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि विवेक मंडुवा थ्रेशर मंडुवे की मड़ाई में समय और श्रम की बचत करता है। यह मशीन कम शक्ति में अधिक कार्य करने में सक्षम है तथा संचालन में सरल है।
मंडुवा थ्रेशर की क्षमता सामान्य फसल में 40–60 किलोग्राम प्रति घंटा तथा अच्छी किस्म की फसल में 60–80 किलोग्राम प्रति घंटा तक बताई गई। वहीं धान थ्रेशर की क्षमता लगभग 80–100 किलोग्राम प्रति घंटा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इन कृषि यंत्रों के प्रयोग से पर्वतीय क्षेत्रों में श्रम की कमी की समस्या का समाधान होगा और किसानों की उत्पादकता में वृद्धि होगी।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों में कृषि यंत्रीकरण तथा सोयाबीन आधारित उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। संस्थान द्वारा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई, जिससे किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ आयवृद्धि के नए अवसर मिल सकें।


