
अल्मोड़ा/बागेश्वर। कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर द्वारा दिनांक 09 से 16 फरवरी, 2026 तक ग्रामीण युवाओं हेतु सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। प्रशिक्षण का विषय “पर्वतीय क्षेत्र में मशरूम एवं मधुमक्खी पालन आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली” रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगारोन्मुख बनाते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से आय वृद्धि के अवसर प्रदान करना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, औद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को समेकित रूप से अपनाकर बेहतर आय अर्जित करने की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण में पगना, औखलीसिरोद, जाँठा, झिरौली बिलौना, भटखोला आदि गांवों के कुल 25 किसानों ने प्रतिभाग किया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने संरक्षित वातावरण में सब्जी उत्पादन एवं फलोत्पादन संबंधी तकनीकी जानकारी दी। विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. नवल किशोर सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय, मुर्गी पालन, बकरी पालन, प्राकृतिक खेती एवं चारा उत्पादन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण समन्वयक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश चन्द्र जोशी ने कीट एवं रोग प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अमित कुमार ने उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जल संरक्षण तकनीक एवं कृषि यंत्रों के उपयोग को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग से डॉ. दीपक पाण्डे एवं उप-परियोजना निदेशक, आत्मा धीरज बिष्ट द्वारा कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना से संबंधित योजनाओं पर अतिथि व्याख्यान दिए गए। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी एवं स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी देते हुए युवाओं को इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
शैक्षिक एवं व्यवहारिक भ्रमण भी कराया गया
प्रशिक्षण के अंतर्गत एक दिवसीय भ्रमण प्रगतिशील कृषक नन्दन सिंह (ग्राम पालड़ीबगड़) के कृषि क्षेत्र में कराया गया, जहाँ प्रतिभागियों ने आवासीय परिसर में विकसित बागवानी मॉडल, मधुमक्खी पालन इकाई एवं समेकित कृषि प्रणाली का अवलोकन किया।
इसके उपरांत प्रतिभागियों को भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (हवालबाग) का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। वैज्ञानिकों ने जल संरक्षण तकनीक, उन्नत मशरूम उत्पादन इकाई, सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक विधियां एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
प्रगतिशील कृषक मनोज भरड़ा (ग्राम कन्स्यारी, गरूड़) ने पशुपालन एवं मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन, चारा प्रबंधन एवं तालाब प्रबंधन के उपाय बताए। साथ ही प्रतिभागियों को कौसानी स्थित चाय बागान का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ पर्वतीय क्षेत्र में चाय उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन की जानकारी दी गई।
समापन दिवस पर बैंकिंग व कौशल विकास की जानकारी
दिनांक 16 फरवरी, 2026 को कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक राकेश मोहन ने विभिन्न ऋण योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), स्वयं सहायता समूह एवं स्वरोजगार हेतु बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी।
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रवक्ता संजय सिंह जनौटी ने युवाओं को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं स्वरोजगार के अवसरों पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि आधुनिक कृषि में तकनीकी ज्ञान एवं मशीनरी का सही उपयोग आय वृद्धि में सहायक सिद्ध होता है।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम के सफल संचालन में नीरज जोशी, मनोज कुमार, डॉ. राजेश कुमार मीणा, महेश कार्की, सौरभ सिंह, राजेन्द्र सिंह एवं बहादुर सिंह का विशेष योगदान रहा।
अल्मोड़ा/बागेश्वर। कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर द्वारा दिनांक 09 से 16 फरवरी, 2026 तक ग्रामीण युवाओं हेतु सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। प्रशिक्षण का विषय “पर्वतीय क्षेत्र में मशरूम एवं मधुमक्खी पालन आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली” रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगारोन्मुख बनाते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से आय वृद्धि के अवसर प्रदान करना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, औद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को समेकित रूप से अपनाकर बेहतर आय अर्जित करने की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण में पगना, औखलीसिरोद, जाँठा, झिरौली बिलौना, भटखोला आदि गांवों के कुल 25 किसानों ने प्रतिभाग किया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने संरक्षित वातावरण में सब्जी उत्पादन एवं फलोत्पादन संबंधी तकनीकी जानकारी दी। विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. नवल किशोर सिंह ने पर्वतीय क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय, मुर्गी पालन, बकरी पालन, प्राकृतिक खेती एवं चारा उत्पादन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण समन्वयक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश चन्द्र जोशी ने कीट एवं रोग प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अमित कुमार ने उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जल संरक्षण तकनीक एवं कृषि यंत्रों के उपयोग को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग से डॉ. दीपक पाण्डे एवं उप-परियोजना निदेशक, आत्मा धीरज बिष्ट द्वारा कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना से संबंधित योजनाओं पर अतिथि व्याख्यान दिए गए। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी एवं स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी देते हुए युवाओं को इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
शैक्षिक एवं व्यवहारिक भ्रमण भी कराया गया
प्रशिक्षण के अंतर्गत एक दिवसीय भ्रमण प्रगतिशील कृषक नन्दन सिंह (ग्राम पालड़ीबगड़) के कृषि क्षेत्र में कराया गया, जहाँ प्रतिभागियों ने आवासीय परिसर में विकसित बागवानी मॉडल, मधुमक्खी पालन इकाई एवं समेकित कृषि प्रणाली का अवलोकन किया।
इसके उपरांत प्रतिभागियों को भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (हवालबाग) का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। वैज्ञानिकों ने जल संरक्षण तकनीक, उन्नत मशरूम उत्पादन इकाई, सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक विधियां एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
प्रगतिशील कृषक मनोज भरड़ा (ग्राम कन्स्यारी, गरूड़) ने पशुपालन एवं मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन, चारा प्रबंधन एवं तालाब प्रबंधन के उपाय बताए। साथ ही प्रतिभागियों को कौसानी स्थित चाय बागान का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ पर्वतीय क्षेत्र में चाय उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन की जानकारी दी गई।
समापन दिवस पर बैंकिंग व कौशल विकास की जानकारी
दिनांक 16 फरवरी, 2026 को कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक राकेश मोहन ने विभिन्न ऋण योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), स्वयं सहायता समूह एवं स्वरोजगार हेतु बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी।
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रवक्ता संजय सिंह जनौटी ने युवाओं को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं स्वरोजगार के अवसरों पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि आधुनिक कृषि में तकनीकी ज्ञान एवं मशीनरी का सही उपयोग आय वृद्धि में सहायक सिद्ध होता है।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम के सफल संचालन में नीरज जोशी, मनोज कुमार, डॉ. राजेश कुमार मीणा, महेश कार्की, सौरभ सिंह, राजेन्द्र सिंह एवं बहादुर सिंह का विशेष योगदान रहा।





